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थानों में डंप पड़ी हैं शिकायतें:3 साल में 67 हजार साइबर फ्रॉड की शिकायतें, केस दर्ज केवल 1 हजार




छत्तीसगढ़ में साइबर फ्रॉड की शिकायतें थानों तक तो पहुंच रही हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में वहीं दम तोड़ रही हैं। पिछले तीन साल में साइबर क्राइम पोर्टल पर राज्य से 67 हजार से ज्यादा ऑनलाइन शिकायतें हुईं, लेकिन इनके मुकाबले करीब एक हजार ही केस दर्ज किए गए। जिले और रेंज के साइबर थाने तो केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। नवा रायपुर में करीब 4.50 करोड़ के स्टेट साइबर थाने की स्थिति और खराब है। यहां भी न तो मामले दर्ज किए जा रहे और न ही थानों से फ्रॉड के केस भेजे जा रहे हैं। पिछले एक साल में स्टेट साइबर थाने में भी औसतन एक दर्जन केस ही दर्ज किए गए हैं। फ्रॉड की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने के कारण ही साइबर क्राइम के पीड़ित भटक रहे हैं। पड़ताल में सामने आया कि थानों में साइबर फ्रॉड की शिकायतों को देखने और उनकी जांच के लिए अलग से अमला ही नहीं है। ऐसे में कई शिकायतें थानों में पड़ी रहती हैं और एक-दो साल बाद उनका खात्मा कर दिया जाता है। थानों में शिकायत लेने के बाद आगे की कार्रवाई का सिस्टम ही नहीं है। राजधानी के प्रमुख थानों के थानेदारों और साइबर एक्सपर्ट से चर्चा में पता चला कि थानों का सामान्य स्टाफ भी कई बार यह नहीं समझ पाता कि साइबर फ्रॉड की शिकायत मिलने के बाद क्या प्रक्रिया अपनाई जाए। ऐसे में शिकायतें डंप पड़ी रहती हैं। एक-दो साल तक कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद उनका खात्मा कर दिया जाता है। ज्यादातर शिकायतें एक-दो लाख रुपए या इससे कम की होती हैं। रकम कम होने से भी थानों में इन मामलों को लेकर ज्यादा रुचि नहीं दिखाई जाती। 3 साल में केवल शिकायतों के आधार 700 करोड़ से अधिक की ठगी हो चुकी है। रेंज साइबर थानों में भी सीमित अमला रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा, बस्तर और दुर्ग में रेंज साइबर थाने हैं, लेकिन इनके पास भी सीमित स्टाफ है। इसलिए इन थानों में मुख्य रूप से 5 लाख रुपए से ज्यादा के साइबर फ्रॉड के केस दर्ज किए जाते हैं। गंभीर प्रकृति के कुछ अपराधों को थाने खुद संज्ञान में लेकर रेंज साइबर थाने में भेजते हैं। इस पूरी व्यवस्था में सबसे अहम कड़ी नवा रायपुर स्थित स्टेट साइबर थाना है। करीब 4.50 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस साइबर थाने को 10 लाख रुपए से ज्यादा के साइबर फ्रॉड का खुद संज्ञान लेकर केस दर्ज करना है। इसके अलावा राज्य के किसी भी थाने में दर्ज साइबर फ्रॉड के केस को खुद मंगवाकर उसकी जांच भी की जा सकती है। को-आर्डिनेशन सेंटर का नोटिफिकेशन जारी राज्य में साइबर फ्रॉड के मामलों की जांच और कार्रवाई में तेजी लाने के लिए अब स्टेट साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (एस4सी) का गठन किया गया है। इसका नोटिफिकेशन भी हो चुका है। इसके गठन के ये फायदे: {स्टेट लेवल पर होगी सीधी मॉनीटरिंग {थानों को मिलेगी तकनीकी मदद {शिकायत से कार्रवाई तक समन्वय {ठगी की रकम फ्रीज कराने में मदद {बैंक-इंटरनेट कंपनियों से सीधा समन्वय। इन जिलों में जिला साइबर थाने लेकिन… राजनांदगांव, कवर्धा, दुर्ग, महासमुंद, जशपुर, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बलौदाबाजार, बालोद जगदलपुर में साइबर थाने हैं लेकिन कहीं साल में 30-40 से ज्यादा केस दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। केवल रायपुर में औसतन 100 से ज्यादा हर केस दर्ज किए जा रहे हैं। इस बीच पड़ताल के दौरान पता चला है कि हैदराबाद में हर साल औसतन 3 हजार तक साइबर फ्रॉड के केस दर्ज किए जा रहे हैं।



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