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कानपुर देहात की ग्राम पंचायत देवराहट में ₹6.53 लाख की वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में गड़बड़ी सिद्ध होने के बाद जिलाधिकारी कपिल सिंह ने ग्राम प्रधान के निलंबन और अनियमित धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं। इस मामले में तत्कालीन ग्राम सचिव को भी दोषी पाया गया है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई जांच के बाद हुई है। जिला पंचायत राज अधिकारी विकास पटेल ने बताया कि देवराहट ग्राम पंचायत में पूर्व में गठित एक जांच समिति ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की पुष्टि की थी। इसके बाद ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव को निलंबित कर दिया गया था। हालांकि, ग्राम प्रधान ने इस कार्रवाई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज में चुनौती दी थी। न्यायालय ने पुनः स्पष्टीकरण प्राप्त कर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए ग्राम प्रधान से स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके उपरांत, जिलाधिकारी कपिल सिंह ने जिला विकास अधिकारी और नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता को संयुक्त जांच के लिए नियुक्त किया। इन दोनों अधिकारियों ने विस्तृत पड़ताल के बाद 22 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में ग्राम प्रधान और तत्कालीन सचिव को कुल ₹6,53,339 की वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया। संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने संबंधित ग्राम प्रधान के निलंबन के निर्देश जारी किए हैं। इसके अतिरिक्त, तत्कालीन सचिव और ग्राम प्रधान से अनियमित धनराशि की वसूली सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों को शासन के नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई को पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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देवराहट पंचायत में 6.53 लाख की वित्तीय अनियमितता सिद्ध:कानपुर देहात में डीएम ने ग्राम प्रधान के निलंबन और वसूली के दिए निर्देश
