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पंजाब में डीए विवाद, सरकार करेगी हाईकोर्ट फैसले की समीक्षा:6 हजार करोड़ जारी; शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस को भी घेरा




पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के महंगाई भत्ते (डीए) व एरियर को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों को बकाया राशि चरणबद्ध तरीके से देने के लिए तैयार किए गए लिक्विडेशन प्लान के तहत 6,000 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। साथ ही, हाईकोर्ट के फैसले में कई कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं हुआ, इसलिए इसकी विधिक समीक्षा कर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। 2016 से लंबित था मामला फाइनेंस मंत्री हरपाल सिंह चीमा के अनुसार, कर्मचारियों के लिए पे कमीशन का गठन अकाली-भाजपा सरकार के दौरान हुआ था। इसकी रिपोर्ट 2016 में आई, लेकिन इसे लंबे समय तक लागू नहीं किया गया। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले रिपोर्ट लागू की गई, जबकि जुलाई 2021 तक का डीए बकाया फ्रीज कर दिया गया था। सरकार के मुताबिक, कुल बकाया 14,191 करोड़ रुपये बनता है। सरकार ने फैसले पर उठाए सवाल चीमा का कहना है कि जिस लिक्विडेशन प्लान को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मंजूरी दी थी, उसे सिंगल बेंच ने रद्द कर दिया। सरकार का दावा है कि ऐसा करते समय सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2005 के एक महत्वपूर्ण फैसले पर भी विचार नहीं किया गया। पंजाब देश का ऐसा राज्य है, जहां कर्मचारियों को सबसे अधिक पे-स्केल दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार, राज्य में कर्मचारियों का वेतन केंद्र सरकार से भी अधिक है। केंद्र के डीए पर भी तैयार चीमा न ने कहा कि यदि अदालत अनुमति देती है तो वह केंद्र सरकार के डीए पैटर्न को अपनाने के लिए भी तैयार है। साथ ही बताया कि वर्ष 2020 में नए कर्मचारियों के लिए सेंट्रल पे कमीशन लागू करने का फैसला लिया गया था। सरकार ने कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया है। इसलिए डीए और एरियर से जुड़े पूरे मामले की कानूनी और संवैधानिक समीक्षा कर आगे का निर्णय लिया जाएगा।



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