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पंजाब-26 अगस्त से थम सकते हैं बसों के पहिए:PRTC मुलाजिमों का सरकार को अल्टीमेटम; कहा-मांगें नहीं मानीं तो करेंगे हड़ताल




पंजाब रोडवेज पनबस-पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने फैसला लिया है कि 26 अगस्त को परिवहन और वित्त मंत्री के साथ होने वाली बैठक में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल सहित कड़ा संघर्ष शुरू करेंगे। ऐसे में लोगों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। यह फैसला आज यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल, उपाध्यक्ष निशान सिंह, हरजीत सिंह, राजिंदर सिंह और गौरव की अगुवाई वाली मीटिंग में हुआ। यूनियन ने बताया कि पिछली हड़ताल के दौरान परिवहन मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए 10 दिन का समय मांगा था। 17 अगस्त की बैठक के बाद सरकार ने फिर 26 अगस्त तक का समय लिया। अब बुधवार को परिवहन और वित्त मंत्री के साथ बैठक प्रस्तावित है। यूनियन की प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, ठेकेदार और बिचौलियों को हटाना, दर्ज मामलों को रद्द करना, समान काम के लिए समान वेतन लागू करना और पहले से मानी गई मांगों को लागू करना शामिल है। प्रदेश अध्यक्ष रेशम सिंह गिल ने कहा कि यदि 26 अगस्त की बैठक में मांगों का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी तत्काल अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए पंजाब सरकार और परिवहन विभाग के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। अब जानिए क्या है मुलाजिमों की मांगें नई बसें नहीं खरीदी, 600 कंडम यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार परिवहन विभाग को चलाने में विफल रही है। पिछले करीब साढ़े चार साल में विभाग में एक भी नई बस नहीं शामिल की गई, जबकि 500 से 600 बसें कंडम हो चुकी हैं। बसों की कमी के कारण यात्रियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई सरकारी बसें टायर, स्पेयर पार्ट्स और बैटरियों की कमी के कारण खड़ी हैं। बसों के टाइम पर निजी ऑपरेटरों का दबदबा यूनियन ने आरोप लगाया कि टाइम टेबल में निजी ऑपरेटरों का दबदबा बढ़ रहा है और कई शहरों में अवैध बसें चल रही हैं। नेताओं ने इसे ट्रांसपोर्ट माफिया का प्रभाव बताते हुए कहा कि सरकारी परमिट पर भी किलोमीटर स्कीम के तहत निजी मालिकों की बसें चलाई जा रही हैं। भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा उन्होंने आउटसोर्स भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदारों और बिचौलियों के जरिए कर्मचारियों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। यूनियन के अनुसार, इस संबंध में मुख्यमंत्री को शिकायतें भी दी गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 17 साल से पक्की नौकरी का इंतजार डिपो प्रधान जतिंदर सिंह और कैशियर अजय कुमार ने कहा कि पनबस और पीआरटीसी के कच्चे कर्मचारी 17-18 साल से आउटसोर्स और करीब 11 साल से कॉन्ट्रैक्ट पर कम वेतन में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में टेस्ट और मेरिट के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इसके बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया गया। जतिंदर सिंह ने कहा कि पहले कर्मचारियों को नियमित करने के लिए 10 साल का बहाना बनाया जाता था। अब 11 साल बाद पर्सोनल और वित्त विभाग की अड़चन का हवाला दिया जा रहा है। यूनियन का दावा है कि परिवहन विभाग के कर्मचारियों से सरकार को करोड़ों रुपए की आमदनी होती है और उन्हें नियमित करने में कोई वित्तीय या कानूनी अड़चन नहीं है।



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