पठानकोट के BSF जवान का पश्चिम बंगाल में निधन:परिवार को नया घर बनाने का किया था वादा; तिरंगे में लिपटा पहुंचा पार्थिव शरीर




पठानकोट के वार्ड नंबर सैली कुलियां में शुक्रवार को उस वक्त हर आंख नम हो गई, जब बीएसएफ जवान सतीश कुमार (23) का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटा हुआ उनके निवास स्थान पहुंचा। एक तरफ जहां जवान के जाने का गहरा गम था, वहीं दूसरी तरफ पूरे इलाके को अपने लाल की शहादत पर गर्व था। बीएसएफ की टुकड़ी ने मातमी धुन बजाकर और हवा में फायर कर शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। बता दें, सतीश कुमार पश्चिम बंगाल में बीएसएफ की 176वीं बटालियन में तैनात थे। बुधवार को अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। जिसके बाद पार्थिव शरीर को पठानकोट उनके निवास पर पहुंचाया गया। जिसके बाद पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई। महीने पहले आया था घर, कहा था- अब नया मकान बनवाऊंगा शहीद सतीश का जीवन संघर्षों से भरा रहा। वे एक बेहद गरीब परिवार से आते थे। उनके पिता रिक्शा चलाते हैं, माता दिव्यांग हैं और परिवार में दो बहनें व एक भाई हैं। पूरा परिवार एक छोटे से कमरे में रहता है। सतीश ने बिना किसी सिफारिश या आर्थिक सहारे के केवल अपनी मेहनत, दौड़ और रेहड़ी पर काम करके सेना में जगह बनाई थी। परिवार ने बताया कि सतीश एक महीने पहले ही पुलिस वेरिफिकेशन के सिलसिले में घर आए थे। तब उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा था कि अब वे अपनी कमाई से परिवार के लिए एक पक्का मकान बनवाएंगे, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। अंतिम संस्कार में गूंजे अमर रहने के नारे शहीद के अंतिम संस्कार में आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज रोहित स्याल और स्थानीय कांग्रेस पार्षद (MC) विजय कुमार सहित भारी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। ‘सतीश कुमार अमर रहें’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। परिजनों को 1 करोड़ और सरकारी नौकरी का आश्वासन आप हलका इंचार्ज रोहित स्याल ने बताया कि पंजाब सरकार की नीति के तहत शहीद के परिवार को 1 करोड़ रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलाने का भी भरोसा दिया।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *