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पहचान की जंग- मां के सरनेम को अपना रहे युवा:एक्टर ब्रैड पिट के बच्चों के पिता का सरनेम बदलने से ट्रेंड बढ़ा




हॉलीवुड के सबसे चर्चित दंपती रहे ब्रैड पिट और एंजेलिना जोली के बच्चों-मैडॉक्स, जाहारा और शिलोह ने पिता ‘पिट’ का सरनेम हटाकर मां का उपनाम ‘जोली’ जोड़ने का फैसला किया है। इसने दुनिया भर में पारिवारिक रिश्तों और पहचान को लेकर नई बहस छेड़ दी है। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यह केवल किसी स्टार किड की कहानी नहीं है, बल्कि दुनिया भर के ऐसे लाखों युवाओं का दर्द है, जो माता-पिता के विवाद या अलगाव के बाद पिता के नाम से दूरी बना रहे हैं। मां के प्रति जुड़ाव दिखा रहे हैं। ये नया ट्रेंड है। फैमिली काउंसलर व पारिवारिक अलगाव की विशेषज्ञ डॉ. बेका ब्लैंड के मुताबिक, ‘जो बच्चे अपने माता-पिता या पिता से किसी सदमे या कटु अनुभवों के कारण दूर हो जाते हैं, उनके लिए पिता का सरनेम हटाना मानसिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। ऐसा करने से उन्हें हर रोज उस नाम को दोहराना नहीं पड़ता, जो उन्हें किसी कड़वे अनुभव या दर्द की याद दिलाता है।’ पिता के नाम का हिस्सा हटाकर मां का नाम जोड़ने वाली कैलिफोर्निया की हन्ना कहती हैं, ‘मेरा नाम उस प्यार को बयां नहीं करता था, जिसने मुझे पाला। मेरी मां का प्यार मेरे लिए सबसे बड़ा था, इसलिए मैंने मां के नाम को अपनी पहचान बनाया। यह मानसिक शांति पाने का जरिया है।’ द वेस्ट ऑफ इंग्लैंड यूनिवर्सिटी में पारिवारिक रिश्तों पर शोध करने वाली डॉ. लूसी ब्लेक कहती हैं कि लोग अक्सर सोचते हैं कि युवा बिना सोचे-समझे ऐसे फैसले लेते हैं, जबकि असलियत यह है कि बच्चे बरसों के सोच-विचार और गहरे मानसिक दर्द से गुजरने के बाद ही पिता का नाम छोड़ने जैसा कड़ा कदम उठाते हैं। इस प्रक्रिया में युवाओं को समाज के तानों और अकेलेपन से भी जूझना पड़ता है। चेस्टर यूनिवर्सिटी के इतिहासकार डॉ. हैरी पार्किन के अनुसार सरनेम का सीधा संबंध पहचान से है। जब कोई इसे बदलता है, तो यह उस व्यक्ति या परिवार से रिश्ता तोड़ने का ऐलान होता है। अपनी अलग पहचान बनाने की इच्छा भी अहम पिता का सरनेम हटाने की मुख्य वजहों में भावनात्मक दूरी, टूटे रिश्ते, मां या नए परिवार से जुड़ाव को पहचान देना और अलग पहचान बनाने की इच्छा है। नामों के इतिहास पर शोध करने वाले डॉ. हैरी पार्किन कहते हैं, ‘जब लोग अपना सरनेम बदलते हैं, तो कई बार वे उस व्यक्ति, परिवार या विगत से खुद को अलग करना चाहते हैं, जिससे वे अब अपनी पहचान नहीं जोड़ते।’



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