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कोंडागांव की बेटी 40 साल बाद साध्वी स्वरूप में लौटीं:चातुर्मास पर साध्वी विराग ज्योति का भव्य नगर प्रवेश, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत




रविवार (19 जुलाई) का दिन कोंडागांव के इतिहास में एक भावनात्मक और अविस्मरणीय अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। करीब 40 वर्षों बाद नगर की बेटी साध्वी विराग ज्योति श्री म.सा. साध्वी स्वरूप में अपनी जन्मभूमि लौटीं। चातुर्मास के शुभ अवसर पर साध्वी विराग ज्योति श्री म.सा., साध्वी श्री जिनज्योति श्री म.सा. एवं साध्वी श्री विश्वज्योति श्री म.सा. का नगर प्रवेश अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ हुआ। गाजे-बाजे और जयघोष के साथ हुआ स्वागत नगर प्रवेश के दौरान गाजे-बाजे, भजन-कीर्तन और “जय जिनेन्द्र” के जयघोष से पूरा शहर भक्तिमय हो उठा। शोभायात्रा में जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु, महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, धार्मिक भजनों और मंगल गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। दादाबाड़ी में हुई धर्मसभा नगर के विभिन्न स्थानों पर समाजजनों ने पुष्पवर्षा कर साध्वी भगवंतों का स्वागत किया। भव्य शोभायात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए श्री जैन श्वेताम्बर दादाबाड़ी पहुंची, जहां धर्मसभा का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु साध्वी भगवंतों के दर्शन और प्रवचन सुनने पहुंचे। जन्मभूमि लौटकर हुईं भावुक धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी विराग ज्योति श्री म.सा. भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, “यही मेरी जन्मभूमि है। जिन लोगों के साथ मैंने बचपन बिताया, खेली, पढ़ी और बड़ी हुई, आज उन्हीं के बीच धर्म, संयम और भक्ति का संदेश देने का अवसर मिला है। यह मेरे जीवन का सबसे सौभाग्यपूर्ण और अविस्मरणीय क्षण है।” आत्मचिंतन का पर्व है चातुर्मास साध्वी विराग ज्योति श्री म.सा. ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का विशेष अवसर है। उन्होंने सभी से धर्म के मार्ग पर चलने और जीवन में संयम अपनाने का संदेश दिया।



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