पानीपत में बैडमिंटन कोच पॉक्सो के आरोपों से बरी:3 साल से ज्यादा समय जेल में रहा, अब सबूतों के अभाव में कोर्ट ने सुनाया फैसला




पानीपत की फास्ट ट्रैक (पॉक्सो) अदालत ने नाबालिग बैडमिंटन खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए उकसाने और यौन शोषण के आरोपी कोच अमित मलिक को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में पाई गई गंभीर विसंगतियों के आधार पर यह फैसला सुनाया। जानकारी देते हुए अमित मलिक के एडवोकेट तरूण शर्मा ने बताया कि इस मामले में बड़ी बात है कि अमित मलिक मामले के बाद से 3 साल 8 दिन तक न्यायिक हिरासत में जेल में भी काट चुके। ये है मामला यह मामला 21 मई 2023 का है, जब पानीपत स्थित अपने घर में 11वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतका के पिता ने शुरुआत में मानसिक तनाव को कारण बताते हुए किसी पर संदेह व्यक्त नहीं किया था, जिससे पुलिस ने धारा 174 के तहत कार्रवाई की थी। हालांकि, अगले ही दिन पिता ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी बेटी के बैडमिंटन कोच अमित मलिक ने उस पर मानसिक दबाव बनाया था। पुलिस ने शुरुआती प्राथमिक जांच के बाद मामला दर्ज किया और बाद में मृतका की बड़ी बहन के बयानों के आधार पर मामले में पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 व 10 और भारतीय दंड संहिता की धारा 305 (नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाना) व 376 जैसी गंभीर धाराएं जोड़ दीं। अदालत की मुख्य टिप्पणियां और बरी होने के कारण चिकित्सकीय जांच (पोस्टमार्टम रिपोर्ट) और वैज्ञानिक साक्ष्यों में भी जबरन यौन शोषण की पुष्टि नहीं हो सकी। अदालत का अंतिम फैसला अदालत ने आयु निर्धारण के मापदंडों के आधार पर यह तो माना कि घटना के समय मृतका की आयु 16 वर्ष से कम (नाबालिग) थी, लेकिन आरोपी अमित मलिक के खिलाफ यौन शोषण, दुष्कर्म या आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई भी ठोस व कानूनी साक्ष्य सिद्ध नहीं हो सका। इन सभी तथ्यों पर गौर करते हुए अदालत ने आरोपी अमित मलिक को धारा 305, 376(3), 376(2)(n) आईपीसी और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 व 10 के तहत लगे सभी आरोपों से पूरी तरह बरी करने का आदेश दिया।



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