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पानीपत DC के निलंबन आदेश पर मंडल आयुक्त की रोक:बाल जटान-खंडरा के सरपंचों को 15 तक राहत, 323 करोड़ की एफडी का मामला




पानीपत जिले में पंचायती भूमि की एफडीआर और बैंक खातों के संचालन में कथित अनियमितता के मामले में डीसी द्वारा निलंबित किए गए बाल जाटान और खंडरा गांव के सरपंचों को करनाल मंडल आयुक्त ने अंतरिम राहत दी है। पानीपत डीसी ने 28 सितंबर को बाल जाटान के सरपंच सुरेंद्र सिंह और खंडरा की सरपंच सोनिया को हरियाणा पंचायती राज अधिनियम के तहत निलंबित किया था। दोनों सरपंचों की ओर से निलंबन आदेश के खिलाफ मंडल आयुक्त के समक्ष अपील दायर की गई। सुनवाई के बाद मंडल आयुक्त ने डीसी के 28 सितंबर के आदेशों के क्रियान्वयन पर 15 अक्टूबर तक अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी। दोनों पंचायतों को 323 रुपए करोड़ मिले मामला पंचायती भूमि की बिक्री से मिली रकम की एफडीआर कराने और बैंक खातों के संचालन से जुड़ा है। आदेश के अनुसार दोनों ग्राम पंचायतों की पंचायती भूमि की आईओसीएल में रजिस्ट्री 30 जून 2026 को हुई थी। इससे बाल जाटान और खंडरा पंचायत को करीब 323 रुपए करोड़ की राशि प्राप्त हुई। इस रकम की नियमानुसार बैंक में एफडीआर कराई गई थी। इसी प्रक्रिया और पंचायत के बैंक खातों को लेकर अतिरिक्त डीसी की रिपोर्ट में आपत्तियां सामने आई। दोनों सरपंचों को निलंबित कर दिया रिपोर्ट में बैंक खातों के संचालन और खाते खोले जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि संबंधित बैंक खाते डीसी की पूर्व अनुमति के बिना खोले गए। पंचायती खातों के संचालन में डीसी और सरपंच के संयुक्त हस्ताक्षर की व्यवस्था का पालन नहीं होने की बात भी सामने आई। इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर डीसी ने दोनों सरपंचों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें पद से निलंबित कर दिया था। बैंक की गलती बताकर मांगी राहत निलंबन के खिलाफ दायर अपील में सरपंचों की ओर से एडवोकेट कौशल ने मंडल आयुक्त के समक्ष दलील दी कि पंचायत की राशि का कोई व्यक्तिगत या गलत इस्तेमाल नहीं हुआ है। एफडीआर में डीसी का नाम शामिल नहीं होना बैंक स्तर की त्रुटि थी। अपील में दावा किया गया कि बैंक अधिकारियों ने भी इस त्रुटि को स्वीकार करते हुए उसे सुधारने की बात कही है। अपील में यह भी कहा गया कि ग्राम पंचायतों ने विधिवत प्रस्ताव पारित कर इम्पेनेल्ड बैंकों में एफडीआर कराई थी। इसके लिए विकास एवं पंचायत विभाग, हरियाणा के 10 अगस्त 2011 के पत्र और 30 मार्च 2026 के विभागीय निर्देशों का पालन किए जाने की दलील दी गई। सरपंचों की ओर से यह भी कहा गया कि निलंबन का आदेश पारित करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने और संबंधित साक्ष्य पेश करने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। ये था 383 करोड़ से अधिक की राशि और एफडी का पेंच ग्राम पंचायत बाल जटान और खंडरा की पंचायती जमीन आईओसीएल को बेची गई थी। इस जमीन के बदले बाल जटान पंचायत को 277 करोड़ और खंडरा पंचायत को 101 करोड़ रुपए मिले थे। सरपंचों के अनुसार इस पैसे की ग्राम पंचायत की ओर से बैंक में एफडी करवा दी गई। जबकि दूसरी ओर प्रशासन का तर्क था कि इन खातों और एफडी को खुलवाते समय डीसी, पानीपत से अनिवार्य पूर्व अनुमति नहीं ली गई और नियमानुसार संयुक्त खाता (डीसी व सरपंच) नहीं बनवाया गया। इसी आधार पर डीसी ने एडीसी की रिपोर्ट पर हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 51(1) के तहत बाल जाटान के सरपंच सुरेन्द्र सिंह और खण्डरा की सरपंच सोनिया को 2 दिन पहले ही उनके पदों से निलंबित कर दिया था।



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