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पीछा करने पर पुलिस पर की थी फायरिंग:पुलिस पर दो गोलियां चलाने वाले आरोपी को 10 साल का सश्रम कारावास




पुलिस टीम पर फायरिंग कर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को देपालपुर की अदालत ने 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश हिदायत उल्ला खान की अदालत ने आरोपी मनोज उर्फ मांगीलाल गतीजा को पुलिस पर फायरिंग और शासकीय कार्य में बाधा डालने का दोषी माना। आरोपी हत्या और सोना लूट के मामले में फरार चल रहा था। अदालत ने आईपीसी की धारा 307 के तहत 10 वर्ष, आयुध अधिनियम की धारा 27(1) के तहत 7 वर्ष, धारा 25(1-बी)(ए) के तहत 2 वर्ष और आईपीसी की धारा 353 के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही कुल 9,500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया। फैसला 15 सितंबर 2026 को सत्र प्रकरण क्रमांक 10/2022 में सुनाया गया। शासन की ओर से अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी विशाल गुप्ता ने पैरवी की। मुखबिर से मिली थी हत्या-लूट के आरोपी की सूचना अभियोजन के अनुसार घटना 20 दिसंबर 2021 की है। देपालपुर थाना प्रभारी निरीक्षक मीना कर्णावत को सूचना मिली थी कि खरगोन जिले के सनावद में हत्या और सोना लूट के मामले में फरार आरोपी रतलाम नंबर की पल्सर बाइक लेकर खड़ा है। वह किसी व्यक्ति का इंतजार कर रहा है। सूचना पर उपनिरीक्षक दीपक राठौर पुलिस बल के साथ बताए गए स्थान पर पहुंचे। देपालपुर-बेटमा मार्ग पर एक संदिग्ध व्यक्ति पल्सर बाइक के साथ दिखाई दिया। पुलिस को देखते ही उसने बाइक छोड़ी और भागने लगा। पीछा किया तो सब इंस्पेक्टर पर दो गोलियां चलाईं पुलिसकर्मियों ने आरोपी का पीछा किया। इसी दौरान उसने उपनिरीक्षक दीपक राठौर को निशाना बनाकर दो गोलियां चला दीं। उपनिरीक्षक ने नीचे बैठकर किसी तरह अपनी जान बचाई। फायरिंग के बाद आरोपी गेहूं के खेत में घुस गया। पुलिस टीम ने ग्रामीणों की मदद से खेत की घेराबंदी की और उसे पकड़ लिया। पिस्तौल, तीन कारतूस और दो खाली खोखे बरामद पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मनोज उर्फ मांगीलाल गतीजा पिता भैरूलाल गतीजा, निवासी सज्जन मिल के पीछे, विरियाखेड़ी, जिला रतलाम बताया। तलाशी में उसके पास से पिस्तौल, मैगजीन और तीन कारतूस बरामद किए गए। घटनास्थल से दो खाली खोखे भी जब्त किए गए। पुलिस के अनुसार आरोपी ने शासकीय कार्य में बाधा डालने और पुलिस अधिकारी की हत्या के इरादे से फायरिंग की थी। मामले में देपालपुर थाने में अपराध क्रमांक 435/2021 दर्ज कर आईपीसी की धारा 307, 353 और आयुध अधिनियम की धारा 25 व 27 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। साक्ष्य जुटाकर कोर्ट में पेश किया अभियोगपत्र विवेचना के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का नक्शा तैयार करने के साथ गवाहों के बयान दर्ज किए। जब्त पिस्तौल और अन्य हथियार संबंधी सामग्री की जांच कराई गई। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अभियोगपत्र न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अदालत ने आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी माना। इसके बाद उसे अलग-अलग धाराओं में सश्रम कारावास और कुल 9,500 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई।



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