Headlines

'पुलिस ने गर्दन पर पैर रखा..शिकायत की पीटने लगे':नालंदा सड़क हादसे में युवक की मौत; परिजन बोले- हमें खदेड़कर बेटे की लाश ले गई पुलिस'




“मेरे बेटे प्रद्युम्न (23) को पहले पुलिस की गाड़ी ने रौंदा, फिर एक पुलिस ने गर्दन पर पैर रखकर दबा दिया। इससे उसकी मौत हो गई। दोषी पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ थाने में शिकायत की है, लेकिन कार्रवाई की जगह पुलिस ने हमें ही खदेड़कर पीटना शुरू कर दिया। पुलिस की लाठी से बचने के खेत में छिप गए। इसी दौरान पुलिस ने मेरे बेटे की लाश उठाई और बख्तियारपुर ले गई।” ये बातें प्रद्युम्न के पिता पिंकू कुमार ने कही है। दरअसल, 15 जुलाई को बाइक सवार प्रद्युम्न को पुलिस की गाड़ी ने रौंद दिया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटनाकी एक तस्वीर सामने आई तो लोग भड़क गए और NH-20 जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के खिलाफ दो FIR की है। इस घटना के बाद भास्कर रिपोर्टर प्रद्युम्न के बलवापर गांव पहुंचा और उसके पिता, भाई और उसकी पत्नी से बात की। पत्नी ने कहा कि पुलिस ने जानबूझ कर बाइक में टक्कर मारी और पैर से गला दबाकर मार दिया। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें…. ‘अस्पताल ले जाने की जगह गर्जन दबाया’ प्रद्युम्न की पत्नी शबरी देवी ने बताया कि पुलिस की गाड़ी से टक्कर हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाना चाहिए था। लेकिन पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। पुलिस ने मेरे पति के गर्दन पर पैर रखकर दबा दिया। इसका वीडियो भी सामने आया है। शबरी ने सरकार से मांग की है कि जिस पुलिसकर्मी ने मेरे पति की हत्या की, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। ‘पुलिस ने प्रद्युम्न को बचाने की कोशिश नहीं की’ मृतक की फुआ शिव जयंती देवी ने कहा कि पुलिस वालों ने प्रद्युम्न को बचाने की कोशिश नहीं की। शव को बिना घर वालों को सूचना दिए और बिना पहचान किए मौके से हटा दिया। इस संबंध में पुलिस अधिकारी से सवाल किया तो वो टालमटोल करते रहे। हम शांतिपूर्ण मुआवजा-जांच की मांग को लेकर सड़क पर बैठे थे, तब पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने सबसे पहले पुरुषों पर डंडे बरसाए और उसके बाद महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। तीन छोटे बच्चों के भविष्य की चिंता प्रद्युम्न कल्याण विगहा के बलवापुर गांव का रहने वाला था। गांव से वो हरनौत थाना क्षेत्र के किचनीपर गांव जा रहा था। इसी दौरान यह घटना हुई थी। प्रद्युम्न कुमार अपने घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था। प्रद्युम्न ड्राइवरी करके अपने दादा, माता-पिता, पत्नी और तीन बच्चों का भरण-पोषण करता था। तीनों बच्चों की उम्र 10 साल के अंदर है। परिवार को चिंता है कि इनका आगे का भविष्य अब कसे सवरेगा। अब जानें 15 जुलाई को क्या हुआ था, पुलिस ने क्या कार्रवाई की…. पोस्टमॉर्टम के बाद सड़क जाम-आगजनी बुधवार देर शाम पोस्टमॉर्टम के बाद लाश जैसे ही परिजन को सौपी गई। ग्रामीणों का गुस्सा पुलिस के खिलाफ भड़क गया। जीडीएम कॉलेज के पास एनएच-20 सैकड़ों की संख्या लोग जुट गए। शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करने लगे। बीच सड़क पर ही आगजनी करने लगे। सड़क पर दोनों ओर 10 किमी लंबा जाम लग गया था। वाहनों की लंबी लाइन लग गई थी। रास्ते से जो लोग भी गुजर रहे थे उनपर पत्थर फेंके जा रहे थे। कई गाड़ियों के शीशे भी फोड़ दिए। लोग रात तक प्रदर्शन करते रहे। स्थिति को संभालने के लिए लाठीचार्ज करनी पड़ी पुलिस के अनुसार, स्थिति को संभालने के लिए पहले अधिकारियों ने शांति से बात की कोशिश की, लेकिन भीड़ का गुस्सा कम नहीं हो रहा था। लोग कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं थे। ईंट-पत्थर के साथ फायरिंग भी की गई। हालात बिगड़ते जा रहे थे। स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया। आंसू गैस के गोले छोड़े। झड़प में 8 पुलिस वाले भी घायल हो गए थे। जिन्हें कल्याण बिगहा रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, फिर बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर करना पड़ा। उपद्रवियों ने पुलिस और निजी गाड़ियों को तोड़ा। पुलिस ने घटनास्थल से 14 बाक, 3 ट्रैक्टर और एक स्कॉर्पियो जब्त की है। जिनके मालिक का अभी पता नहीं चला है। पुलिस ने 100 से 200 अज्ञात पुरुषों को आरोपी बनाया पुलिस ने 15 जुलाई को दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की है। आगजनी, पथराव और उपद्रव में मृतक के पिता पिंकू, रोहित, धर्मेंद्र, सोनू, मनी, सिंटू, चंद्रशेखर, पप्पू, शंकर, अभिषेक, आरती, संजय, कुंदन, महेंद्र, पंकज, मनीष, हरिंदर, सुबोध, धीरज, पिंटू, अभिषेक और शिशुपाल को नामजद किया है। इसके अलावा, 100 से 200 अज्ञात पुरुष और 30 से 40 अज्ञात महिलाओं को भी आरोपी बनाया गया है। दूसरी प्राथमिकी दिन में हुए सड़क जाम के मामले में अभिषेक, पिंकू, रोहित, धर्मेंद्र, सोनू और सुबोध सहित सात लोगों को नामजद किया गया है। जांच में जो दोषी पाएगा जाएगा उसपर कार्रवाई होगी- डीएसपी सदर डीएसपी-2 संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि हरनौत थाना क्षेत्र में पुलिस की बोलेरो और बाइक की टक्कर हो गई थी, जिसमें दोनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायल युवक को पुलिस सदर अस्पताल, बिहारशरीफ ले गई थी, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल की जा रही है, जिसमें घायल के साथ पुलिसकर्मी आपत्तिजनक व्यवहार करते हुए दिख रहे हैं। प्राथमिक जांच में यह फोटो सही नहीं पाई गई है और यह मूल वीडियो या फोटो के साथ छेड़छाड़ कर बनाई गई प्रतीत होती है। पुलिस की भूमिका और दुर्घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, चाहे वह आम नागरिक हो या पुलिसकर्मी, उस पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *