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रियांबड़ी के पास पीपलिया गांव में जिस व्यक्ति का परिवार ने मरा समझकर अंतिम संस्कार किया। वो जिंदा मिला। पुलिस ने जेब में मिली पर्ची के आधार पर एक शव की पहचान नाथूराम रैगर के रूप में की थी और उनके बेटे तिलोक राम को सौंप दिया था। बेटा बोला था- उसके पिता नहीं है तिलोक राम ने बताया कि उनकी मां ने शाम को फोन कर बताया था कि उनके पिता का शव मिला है। उन्होंने उस नंबर पर संपर्क किया, जहां उनकी बात पुष्कर थाने के हेड कॉन्स्टेबल शक्ति सिंह से हुई। वह पुष्कर के राजकीय अस्पताल पहुंचे और शव देखकर पुलिस को बताया कि यह उनके पिता नहीं हैं। शव की जेब में मिली थी पर्ची इसके बावजूद पुलिस ने जेब से मिली पर्ची में नाथूराम का नाम होने की बात कही। तिलोक राम ने बताया कि उनके पिता कई महीनों से घर से बाहर रहते थे और घर में भी उनकी ज्यादा नहीं बनती थी। इसी वजह से वह शव को लेकर असमंजस में थे। अगले दिन पुलिस की मौजूदगी में राजकीय अस्पताल पुष्कर में शव का पोस्टमार्टम कराया गया और शव तिलोक राम को सौंप दिया गया। पिता कई महीनों से घर से बाहर रहते थे इसके बाद परिवार ने समाज की रीति-रिवाजों के अनुसार शव का अंतिम संस्कार कर दिया। तीसरे दिन की रस्म भी पूरी कर ली गई थी। अंतिम संस्कार के तीसरे दिन आया परिचित का फोन तीसरे दिन एक परिचित का फोन आया, जिसने बताया कि उनके पिता नाथूराम पिंचोलिया गांव में काम कर रहे हैं। यह सुनकर तिलोक राम परिवार के साथ पिंचोलिया पहुंचे। वहां नाथूराम जीवित मिले और काम कर रहे थे। परिजन उन्हें अपने घर ले आए।
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पुलिस ने गलत शव पिता बताकर बेटे को सौंपा:परिवार ने अंतिम संस्कार किया; तीसरे दिन जिंदा मिले नाथूराम
