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पुलिस मुठभेड़ में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ढेर:साहिबगंज से धनबाद जेल शिफ्ट करने के दौरान जामताड़ा में पुलिस का हथियार छीनकर भागने की कोशिश




गैंगस्टर सुजीत सिन्हा रविवार रात 9:29 बजे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। साहिबगंज जेल में बंद सुजीत को धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था। चार गाड़ियों के काफिले के साथ पुलिस टीम दोपहर बाद करीब तीन बजे उसे लेकर निकली। साहिबगंज-गोविंदुपर हाईवे पर जामताड़ा थाना क्षेत्र के सुपाईडीह गांव में शंभु लाइन होटल के पास अचानक पुलिस की गाड़ी पंक्चर हो गई। उसे दूसरी गाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा था। तभी सुजीत ने टॉयलेट जाने की बात कही। गाड़ी से उतारते ही अचानक उसने एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर फायरिंग करते हुए भागने लगा। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। सुजीत सिन्हा को गोली लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। इसकी पुष्टि घटनास्थल पर पहुंची डॉक्टरों की टीम ने की। सुजीत सिन्हा के मारे जाने की सूचना मिलते ही जामताड़ा एसपी शंभु सिंह सहित कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहंचे। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। वर्ष 2016 में उसका अपराध चरम पर था। रंगदारी मांगने के साथ वह कारोबारियों की हत्या भी कर रहा था। रांची पुलिस सक्रिय हुई तो वह ओडिशा भाग गया। वहां चिल्का झील के पास से उसे गिरफ्तार किया गया। तब से वह जेल में था। यह उसकी 16वीं बार जेल शिफ्टिंग थी। चार दृश्यों से समझिए एनकाउंटर की पूरी कहानी
दोपहर 3 बजे- साहिबगंज जेल से रवाना
साहिबगंज मंडल कारा से गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को धनबाद जेल के लिए चार गाड़ियों के काफिले में कड़ी सुरक्षा के साथ रवाना किया गया। रात 9ः15 बजे- हाइवे पर गाड़ी पंक्चर
साहिबगंज-गोविंदपुर हाइवे पर पुलिस की गाड़ी पंक्चर हो गई। दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करते समय उसने टॉयलेट जाने की इच्छा जताई। रात 9ः25 बजे पुलिस का हथियार छीना
गाड़ी से उतरते ही अचानक उसने पुलिसकर्मी की राइफल छीन ली। फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश करने लगा। रात 9ः40 बजे जवाबी कार्रवाई में मारा गया
जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने गोली चलाई, जो उसके सीने में लगी। वह झाड़ी में गिर पड़ा। पुलिस ने डॉक्टरों को बुलाया, जिन्होंने उसे मृत घोषित कर दिया। अमन के बाद सुजीत… कहानी वही, किरदार नया
झारखंड के दो कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू और सुजीत सिन्हा के एनकाउंटर के बीच भले ही डेढ़ साल का अंतर हो, लेकिन दोनों मामलों में पुलिस की ओर से सामने आया घटनाक्रम कई जगह एक-दूसरे से मेल खाता है। दोनों को एक जेल से दूसरी जेल ले जाया जा रहा था। दोनों बार रास्ते में पुलिस वाहन किसी वजह से रुक गया। पुलिस का दावा है कि इसी दौरान दोनों ने पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर भागने की कोशिश की, फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में मारे गए। इन समानताओं ने दोनों हाई-प्रोफाइल एनकाउंटर को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। 11 मार्च 2025 को अमन साहू को छत्तीसगढ़ की रायपुर जेल से ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया जा रहा था। आज एफएसएल की टीम रांची से पहुंचेगी, मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में होगा पोस्टमार्टम
सोमवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जांच संबंधी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसकी वीडियोग्राफी भी होगी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। वहीं रांची से एफएसएल टीम भी आज रांची से घटनास्थल पर पहुंचेगी। उधर, पुलिस के साथ अब सीआईडी भी इस मामले की जांच करेगी। हथियार छीनकर भागने की कोशिश कर रहा था… जिस गाड़ी में वह बैठा था, उसका टायर पंक्चर हो गया था। जिसके बाद उसे दूसरे गाड़ी में शिफ्ट किया जा रहा था। इस दौरान उसने एक जवान का हथियार छीनकर फायरिंग करने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में उसे गोली लगी। डाक्टरों को बुलाया गया। उसकी जांच कराई गई। डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। -शंभू कुमार सिंह, एसपी जामताड़ा सुजीत के डॉन बनने की कहानी पहली हत्या: साइड नहीं देने पर रिक्शावाले को मार डाला
पलामू जिले के मेदिनीनगर शहर थाना क्षेत्र के श्रीराम पथ, रेड़मा-पांकी रोड का एक घर। यहीं 1980 के दशक के अंत में पैदा हुआ था सुजीत सिन्हा। दो भाइयों में बड़ा, घर में दो बहनें और मां। कम उम्र में ही पिता का साया सिर से उठ गया। स्थानीय रोटरी स्कूल से पढ़ाई की। स्कूल लाइफ में ही दोस्तों से कहा करता था – एक दिन डॉन बनूंगा। सुजीत ने अपराध की शुरुआत 2005 में की। जगह थी शहर का सेवा सदन इलाका। एक रिक्शा चालक कृष्णा साव से साइड लेने को लेकर कहासुनी हुई। गुस्से में सुजीत ने सरेआम गोली मार दी। यह पहला मर्डर था। हालांकि सबूत के अभाव में वह 2024 में बरी हो गया। दूसरी घटना: शेखर कंस्ट्रक्शन पर बमबाजी
पहली हत्या के बाद सुजीत ने रंगदारी का रास्ता पकड़ा। रेड़मा-पांकी रोड पर ही शेखर कंस्ट्रक्शन का ऑफिस था। दिनदहाड़े सुजीत व उसके साथियों ने ऑफिस पर बम फेंका। इसके बाद उसकी डॉन की छवि बन गई। टर्निंग पॉइंट: 2007 में बेलवाटीकर का डबल मर्डर
सुजीत ने सबसे ज्यादा दहशत 2007 में फैलाई। मेदिनीनगर के बेलवाटीकर में दो सगे भाइयों भूषण सिंह और सुनील सिंह की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसे उम्रकैद की सजा हुई।
रंगदारी: व्यवसायियों से एके 47 राइफल मांगता था
सुजीत रंगदारी में पैसे के साथ ही एके 47 की भी डिमांड करता था। 2014 में पलामू में स्टोन क्रशर व्यवसायी उदय शंकर अग्रवाल से रंगदारी में एके-47 मांगी थी। जेल गया तो प्रेमिका-पत्नी ने संभाली कमान
सुजीत के जेल जाने के बाद उसकी प्रेमिका प्रियंका ने गिरोह की कमान संभाल ली। वह सुजीत और शूटरों के बीच अहम कड़ी बन गई। प्रियंका का काम फंड मैनेजमेंट था। शूटरों को हथियार के लिए पैसे उपलब्ध कराना और उसके ठहरने और भागने के लिए सु​रक्षित ठिकानों का इस्तेमाल करना था। प्रियंका की गिरफ्तारी के बाद गैंग की कमान सुजीत की पत्नी रिया सिन्हा ने संभाली। रंगदारी के पैसे रियल एस्टेट और शेल कंपनियों में लगाया।



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