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डिंडौरी जनपद की ग्राम पंचायत कसईसोंढा में सरकारी पैसे के गबन के मामले में पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते को 30 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है। मंगलवार को यह फैसला जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी ने सुनाया है। यह पूरा मामला साल 2021 में आदिवासी विकास परियोजना के तहत सी.सी. रोड निर्माण में हुई वित्तीय गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है। हालांकि, सजा के दौरान पूर्व सरपंच को कहां रखा जाएगा, आदेश में यह साफ नहीं है और इसके लिए एसपी को पत्र लिखा गया है। 9 लाख की सड़क में 5.30 लाख रुपए का घोटाला प्राथमिक शाला भवन से अनुसुईया के घर तक नीचे टोला में सी.सी. रोड बनाने के लिए 9 लाख रुपए मंजूर हुए थे, जिसमें से 7 लाख रुपए निकाल लिए गए थे। जांच और मूल्यांकन में पता चला कि सिर्फ 1.70 लाख रुपए का ही काम कराया गया था, जिससे सीधे तौर पर 5.30 लाख रुपए की हेराफेरी साबित हुई। पूर्व सचिव ने जमा किए पैसे, पूर्व सरपंच ने नहीं दी राशि इस मामले में मध्य प्रदेश पंचायतराज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 89 के तहत कार्रवाई की गई। पूर्व सचिव ने अपने हिस्से के 2.65 लाख रुपए 14 फरवरी 2025 को सरकारी खजाने में जमा कर दिए थे। वहीं पूर्व सरपंच नोखेलाल परस्ते से 2.65 लाख रुपए की वसूली के लिए धारा 92 के तहत केस दर्ज किया गया, लेकिन काफी समय मिलने के बाद भी उन्होंने पैसा जमा नहीं किया। आदेश न मानने पर 30 दिन की जेल मामले की सुनवाई के बाद 29 जनवरी 2026 को अंतिम आदेश जारी कर नोखेलाल परस्ते को 15 दिनों के अंदर 2.65 लाख रुपए जमा करने को कहा गया था। इस आदेश का पालन न करने पर अब राशि की वसूली पक्की करने के लिए उन्हें पकड़े जाने की तारीख से 30 दिनों के लिए जेल में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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पूर्व सरपंच को 30 दिन की जेल की सजा:डिंडौरी जिला पंचायत सीईओ का फैसला, सड़क निर्माण में किया था घोटाला
