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'पूर्व CM की बेटी को पूछताछ कर छोड़ा':गुरुग्राम कोर्ट ने SIT को फटकारा; जज बोले- अन्य आरोपी जेल में, रोशनी पर इतनी मेहरबानी क्यों




हरियाणा के पूर्व CM चौधरी भजनलाल की बेटी रोशनी बिश्नोई को SIT पूछताछ के बाद छोड़ने पर गुरुग्राम की विशेष अदालत ने कड़ी टिप्पणी की है। रोशनी को मंगलवार को कोर्ट में पेश होना था। उनके खिलाफ धारा 82 सीआरपीसी के तहत उद्घोषणा जारी होने के बावजूद वह पेश नहीं हुईं। वहीं, 14 सितंबर को SIT ने उनसे पूछताछ की और बाद में छोड़ दिया। इस पर कोर्ट ने SIT की कार्यप्रणाली पर ऐतराज जताया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- एक ही घटना और समान परिस्थितियों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी का अलग-अलग आरोपियों के साथ अलग रवैया नहीं हो सकता। इस मामले में जूडीशियल मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) श्रीदेव राय ने टिप्पणी करते हुए कहा- जांच एजेंसी कानून के अनुसार निष्कर्ष निकालने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। लेकिन जब रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से जांच का रुख बदलता दिखे और एक ही घटना से जुड़े आरोपियों के साथ अलग-अलग तरीके अपनाए गए हो, तो कोर्ट स्पष्टीकरण मांगने का हक रखता है। यदि परिस्थितियां समान हैं, तो अलग कार्रवाई के लिए SIT के पास ठोस और प्रमाणित कारण होने चाहिए। कोर्ट के 4 मुख्य सवाल, जिन पर SIT घिरी… अन्य आरोपी जेल में, फिर रोशनी बिश्नोई को राहत क्यों? अदालत ने टिप्पणी की- इसी FIR और समान घटना में शामिल कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, उन पर मुकदमा चला और वे लंबे समय तक हिरासत में रहे। फिर रोशनी बिश्नोई को जांच में शामिल करके बिना गिरफ्तार किए छोड़ने के पीछे क्या ठोस कारण हैं। ₹2.38 करोड़ के संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जांच का क्या हुआ? मृतक सुनील कुमार के नाम से संचालित खाते से रोशनी बिश्नोई के बैंक खाते में आए लगभग ₹2.38 करोड़, ई-मेल आईडी और सह-आरोपी के बयान जैसे गंभीर साक्ष्यों के बावजूद SIT किस आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंची कि गिरफ्तारी योग्य सबूत नहीं हैं। जांच अधूरी, फिर भी ठोस सबूत न होने का दावा कैसे? कोर्ट ने कहा कि जब दस्तावेजों का सत्यापन, बैलेंस शीट और गूगल से ई-मेल पत्राचार की प्रक्रिया अभी लंबित है, तो SIT ने यह निष्कर्ष इतनी जल्दबाजी में कैसे निकाल लिया। 15 सितंबर की पेशी के बावजूद कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया? SIT को भली-भांति पता था कि कोर्ट ने वारंट और उद्घोषणा की प्रक्रिया पूरी की है और 15 सितंबर को उनकी कोर्ट में उपस्थिति तय थी। 14 सितंबर को जब आरोपी SIT के समक्ष उपलब्ध थीं, तो उन्हें हिरासत में लेकर कोर्ट के सामने पेश करने की जगह क्यों छोड़ दिया गया। 29 सितंबर को SIT को देना होगा बिंदुवार जवाब रोशनी बिश्नोई के एडवोकेट द्वारा उद्घोषणा की कार्यवाही रद्द करने के लिए दाखिल आवेदन पर कोर्ट ने कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया, क्योंकि रोशनी खुद कोर्ट में उपस्थित नहीं हुईं। अदालत ने SIT को आदेश दिया है कि 29 सितंबर तक कोर्ट के सभी 11 बिंदुओं पर केस डायरी व रिकॉर्ड के साथ बिंदुवार स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए। साथ ही संबंधित जांच अधिकारी को भी रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने भरोसा दिलाया है कि SIT के रुख और स्पष्टीकरण पर विचार किए बिना रोशनी बिश्नोई को अपराधी घोषित नहीं किया जाएगा। अब जानिए क्या है पूरा मामला… मृत व्यक्तियों के नाम फर्जीवाड़े का आरोपः गुरुग्राम के सेक्टर-14 थाने में दर्ज FIR के मुताबिक, शिकायतकर्ता धर्मवीर बिश्नोई ने रोशनी बिश्नोई और उनके पति अनूप बिश्नोई पर गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत में कहा गया कि दोनों ने मृत व्यक्तियों के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और उनका इस्तेमाल संपत्ति के सौदों में किया। फर्जी पैन कार्ड पर प्लॉट खरीदे-बेचेः आरोप है कि फर्जी पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए सेक्टर-23 और 23 A के महंगे प्लॉटों की अवैध खरीद-फरोख्त की गई। मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत IPC की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर रखी है। पिता-चाचा के नाम थे प्लॉट: शिकायतकर्ता धर्मवीर के मुताबिक, गुरुग्राम के सेक्टर-23 और 23 A में उसके पिता सुनील और चाचा संदीप कुमार के प्लॉट थे। चाचा संदीप की 1 जुलाई 2004 को मौत हो चुकी थी। आरोप है कि उनकी मौत के कई साल बाद उनके नाम के प्लॉट को फर्जी दस्तावेजों के जरिए ट्रांसफर किया गया। मृतक के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए: शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने संदीप कुमार की जगह किसी दूसरे व्यक्ति को पेश कर पजेशन सर्टिफिकेट और NOC हासिल की। इसके बाद फर्जी हलफनामा और दस्तावेजों के आधार पर 2017 में प्लॉट की कन्वेंस डीड कराकर उसे नीलम सिक्का, अशोक कुमार और राज कुमार सिक्का के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। पैन-लाइसेंस पर अलग-अलग लोगों की फोटो: आरोप है कि मृतक संदीप कुमार के नाम से बने पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस पर अलग-अलग लोगों की तस्वीरें लगी थीं। शिकायतकर्ता का दावा है कि फर्जी हस्ताक्षर और दस्तावेजों का मिलान किए बिना ही कन्वेंस डीड रजिस्टर कर दी गई।



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