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समस्तीपुर जिले के तीन प्रखंडों में 2.33 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन की ओर से 121 कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि प्रत्येक कम्युनिटी किचन में रोजाना एक हजार से अधिक लोग भोजन कर रहे हैं। किचन तक पहुंचने वाले हर बाढ़ पीड़ित को पर्याप्त मात्रा में चावल, दाल और एक सब्जी उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, प्रशासन के दावों से अलग जमीनी हकीकत कुछ और नजर आई। बाढ़ प्रभावित लोगों को तीन-तीन किलोमीटर तक नाव से सफर कर कम्युनिटी किचन पहुंचना पड़ रहा है। घर के पुरुष और बच्चे तो किसी तरह किचन तक पहुंच रहे हैं, लेकिन महिलाएं वहां नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे में उन्हें घर पर ही किसी तरह भोजन का इंतजाम करना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावितों का आरोप है कि कम्युनिटी किचन से भोजन घर ले जाने की व्यवस्था नहीं है। जबकि जिला प्रशासन की ओर से घोषणा की गई थी कि जरूरतमंद बाढ़ पीड़ितों तक घर पर भोजन पहुंचाया जाएगा। जमीनी स्तर पर कई प्रभावित परिवारों का कहना है कि यह व्यवस्था अब तक उन तक नहीं पहुंची है। डुमरी में छह फीट तक पानी, नाव से किचन पहुंच रहे लोग डुमरी के कम्युनिटी किचन में मिले रामचंद्र पासवान ने बताया कि उनके घर में अभी भी करीब छह फीट तक पानी है। वह बच्चों के साथ नाव से कम्युनिटी किचन पहुंचते हैं। यहां उन्हें दो समय भोजन मिल रहा है, लेकिन घर की महिलाएं किचन तक नहीं आ पाती हैं। उनके लिए अलग से भोजन नहीं दिया जाता। रामचंद्र ने कहा कि प्रशासन की ओर से घोषणा की गई थी कि नाव के जरिए घर तक भोजन पहुंचाया जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है। गांव में सिर्फ दो मीटर पन्नी मिली है। भोजन के अलावा अब तक कोई दूसरी सहायता नहीं मिली है। कमर तक पानी, छत पर खाना बनाने को मजबूर महिलाएं डुमरी वार्ड-7 निवासी शिवपूजन पासवान ने बताया कि उनके घर में अभी भी कमर तक पानी भरा हुआ है। वह कम्युनिटी किचन पहुंचकर दिन में दो बार भोजन कर लेते हैं, लेकिन घर की महिलाएं किचन तक नहीं आ पाती हैं। उनके लिए भोजन भी नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि घर की महिलाएं छत पर ही किसी तरह खाना बनाकर गुजारा कर रही हैं। गांव में पन्नी के अलावा अब तक कोई खास राहत सामग्री नहीं मिली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या सिर्फ एक कम्युनिटी किचन की नहीं है। कई जगहों पर किचन तक पहुंचने वाले लोगों को ही भोजन मिल रहा है। जो लोग पानी से घिरे घरों से निकलकर किचन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, उनके लिए घर तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो सकी है। नदी पार कर किचन पहुंचना मुश्किल, घर में ही बना रही खाना बेरी विशनपुर की रहने वाली जशिया देवी ने बताया कि नदी के पार भोजन के लिए कम्युनिटी किचन बनाया गया है। नदी पार कर रोजाना भोजन करने के लिए जाना आसान नहीं है। इसी वजह से वह गांव में ही किसी तरह भोजन बनाकर खा रही हैं। सामाजिक संगठनों के लोग महिलाओं तक पहुंचा रहे सूखा राशन कम्युनिटी किचन तक नहीं पहुंच पाने वाली महिलाओं के घर भोजन नहीं पहुंचने की शिकायतों के बाद सामाजिक संगठनों के लोग मदद के लिए आगे आए हैं। मोहिउद्दीननगर क्षेत्र के पर्यावरण कार्यकर्ता सुजीत कुमार भगत ने बाढ़ प्रभावित बिशनपुर बेरी पंचायत के अलग-अलग वार्डों में नाव से पहुंचकर सूखा भोजन, चूड़ा, गुड़ और दवाइयों का वितरण किया। उन्होंने बताया कि लगातार सूचना मिल रही थी कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की महिलाएं कम्युनिटी किचन तक नहीं पहुंच पा रही हैं और उन्हें भोजन नहीं मिल रहा है। इसी को देखते हुए उन्होंने नाव से प्रभावित गांवों में पहुंचकर जरूरतमंद परिवारों के लिए भोजन और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की पहल की। विधायक ने कहा- महिलाओं के लिए घर तक भोजन पहुंचाने का निर्देश मोहिउद्दीननगर से भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच पर्याप्त राहत की व्यवस्था की गई है। 121 कम्युनिटी किचन के अलावा पशुओं के लिए राहत कैंप और मेडिकल कैंप भी लगाए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से प्रभावित लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं कम्युनिटी किचन तक नहीं पहुंच पा रही हैं, उनके लिए भी भोजन की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। किचन संचालकों को कहा गया है कि ऐसे प्रभावित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराया जाए, ताकि कोई महिला भूखी न रहे।
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प्रशासन का दावा- सभी को मिल रहा भोजन:जमीनी हकीकत: घर की महिलाओं तक नहीं पहुंच रहा खाना, पुरुष और बच्चे ही नाव से पहुंच रहे किचन तक
