Headlines

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहीं ममता‎:गन्ने के चूरे और गोबर से खाद बनाकर 1.60 एकड़ खेत में उगा रहीं 4 फसलें




अंबिकापुर-बनारस रोड पर स्थित चठिरमा की महिला किसान ममता सरकार अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम (आईएफएस) मॉडल की नई मिसाल पेश कर रही हैं। वे वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित खेती कर रही हैं। इससे न केवल उनके खेतों को रसायन-मुक्त होने का लाभ मिल रहा है, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी बेहद सशक्त हुई हैं। ममता अपने 1.60 एकड़ के खेत में फसल बदल-बदलकर एक साल में चार अलग-अलग फसलें ले रही हैं। इन खेतों में वे मुख्य रूप से करेला, मूली, बरबट्टी और आलू की उपज ले रही हैं। मूली की फसल से उन्हें विशेष रूप से काफी अच्छा मुनाफा हो रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र, अंबिकापुर के वैज्ञानिकों की सलाह पर रासायनिक खेती से दूरी बनाते हुए ममता पूरी तरह से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही हैं। प्राकृतिक खाद के लिए बाजार पर निर्भर रहने के बजाय वे सूरजपुर जिले के केतका शुगर मिल से पेराई के बाद गन्ने का बचा हुआ चूरा लाती हैं। इस चूरे को गोबर के साथ मिलाकर वे प्राकृतिक खाद खुद तैयार करती हैं। इस खाद के उपयोग से न सिर्फ उपज अच्छी होती है, बल्कि फसल को पूरी तरह ऑर्गेनिक ग्रोथ मिलती है। इंटीग्रेटेड फार्मिंग को अपनाते हुए वे खेती के साथ-साथ गाय पालन और मुर्गी पालन भी कर रही हैं। दूध और अंडे के व्यवसाय से उन्हें हर सीजन में अच्छी अतिरिक्त आमदनी हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि ममता केवीके के वैज्ञानिकों की सलाह और तकनीकी मार्गदर्शन पर ही खेती कर रही हैं। उन्होंने कम जमीन में भी इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम मॉडल अपनाया। उन्होंने जैविक खाद तैयार कर अपनी लागत आधी कर दी। सब्जियों के अलावा ममता बारहों महीने फूलों की खेती भी करती हैं। इसमें गेंदा उनकी आय का सबसे प्रमुख स्रोत है। वे अगस्त महीने में गेंदे की खेती की शुरुआत करती हैं। इसके फूल दीपावली के वक्त नवंबर में पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। वे बाजार में हाथों-हाथ बिक जाते हैं। अच्छी क्वालिटी के फूल तैयार करने के लिए वे गेंदे की गांछी विशेष रूप से कोलकाता से मंगवाती हैं। खेती के इस पूरे काम में उनके पति गौतम सरकार, बेटी प्रिया और बेटा सुमित भी उनका भरपूर साथ देते हैं। ममता बताती हैं कि शुरुआत में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बिल्कुल ठीक नहीं थी, लेकिन खेती की बदौलत ही आज वे साल में 8 से 10 लाख रुपए की आमदनी कर रही हैं।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *