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बहादुरगढ़ में जेन-जी की मंत्री शेखावत के सामने बेबाक बात:बोले- देश में ही मिलें बेहतर अवसर,डूसू अध्यक्ष आर्यन मान के निवास पर हुआ संवाद




बहादुरगढ़ में हर घर तिरंगा अभियान के तहत केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत बहादुरगढ़ पहुंचे। उन्होंने डूसू अध्यक्ष आर्यन मान के निवास पर जेन-जी के युवाओं के साथ संवाद किया। कार्यक्रम की शुरुआत तिरंगा फहराने और राष्ट्रध्वज को सलाम करने के साथ हुई। इसके बाद युवाओं के साथ भारतीय संस्कृति, विरासत, डिजिटल दौर में युवाओं की भूमिका और देश में उनके भविष्य को लेकर खुलकर चर्चा हुई। डिजिटल माध्यमों से युवाओं तक पहुंचे भारतीय संस्कृति और इतिहास संवाद के दौरान युवाओं ने कहा कि जेन-जी का जुड़ाव डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया से सबसे अधिक है। ऐसे में भारतीय संस्कृति, इतिहास और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल माध्यमों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए। युवाओं का कहना था कि सोशल मीडिया के जरिए देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को युवाओं के बीच नए और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है। प्रतिभा पलायन पर युवाओं ने रखी स्पष्ट राय बैठक में प्रतिभा पलायन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। युवाओं ने मंत्री के सामने कहा कि देश में बेहतर शिक्षा, रोजगार, शोध, स्टार्टअप और करियर के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में युवा बेहतर अवसरों की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं। यदि उन्हें भारत में ही अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर माहौल और अवसर मिलें तो वे विदेश जाने के बजाय देश में रहकर विकास में योगदान देना पसंद करेंगे। युवाओं ने कहा कि ऐसा माहौल तैयार किया जाना चाहिए, जहां युवा अपने हुनर, नए विचारों और नवाचार के जरिए आगे बढ़ सकें। उन्होंने रोजगार के साथ-साथ रिसर्च, उद्यमिता और स्टार्टअप के क्षेत्र में युवाओं को प्रोत्साहित करने की जरूरत भी बताई। युवाओं की आवाज नीति निर्माण तक पहुंचाने पर जोर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने युवाओं की बातों और सुझावों को गंभीरता से सुना। उन्होंने संवाद के दौरान युवाओं के विचारों को समझने और उनके सुझावों पर चर्चा की। कार्यक्रम में युवाओं ने देश के भविष्य को लेकर अपनी अपेक्षाएं भी साझा कीं। डूसू अध्यक्ष आर्यन मान ने कहा कि जेन-जी देश के भविष्य को दिशा देने वाली पीढ़ी है। युवाओं के साथ इस तरह के संवाद उनकी सोच, अपेक्षाओं और चुनौतियों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज और उनके सुझाव नीति निर्माण तक पहुंचने चाहिए। इसके लिए ऐसे संवाद लगातार आयोजित किए जाने की जरूरत है। कार्यक्रम में युवाओं ने देश की संस्कृति और विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत को ऐसा अवसर केंद्र बनाने की जरूरत बताई, जहां युवा अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग देश में रहकर कर सकें।



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