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चित्रकूट में बारिश के मौसम के साथ पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल शुरू हुई है। ‘जल जंगल जुगनू’ संस्था के स्वयंसेवक सड़कों, पहाड़ियों, जंगलों और ग्रामीण मार्गों पर नीम, जामुन, आम और महुआ समेत देशी प्रजातियों के बीज बिखेर रहे हैं। संस्था का उद्देश्य वर्षा ऋतु का लाभ उठाकर प्राकृतिक तरीके से अधिक से अधिक वृक्ष तैयार करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बचाना है। अभियान के तहत जंगलों की खाली भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों, नदी किनारों और सड़क किनारे उपयुक्त स्थानों पर देशी प्रजातियों के बीज डाले जा रहे हैं। संस्था का मानना है कि बारिश के पानी से इन बीजों का अंकुरण होगा और समय के साथ ये बड़े वृक्ष बनकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन को मिलेगा सहारा संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि नीम, जामुन, आम और महुआ जैसे देशी वृक्ष केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। ये पक्षियों, वन्यजीवों और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण आधार भी हैं। इनकी संख्या बढ़ने से जैव विविधता को संरक्षण मिलेगा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी। बिना सरकारी मदद के चल रही मुहिम धार्मिक और प्राकृतिक महत्व वाले चित्रकूट में बढ़ते शहरीकरण, वनों की कटाई और बदलती जीवनशैली के कारण हरित क्षेत्र लगातार प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे समय में ‘जल जंगल जुगनू’ संस्था बिना किसी सरकारी सहायता या आर्थिक लाभ के केवल सामाजिक जिम्मेदारी और प्रकृति संरक्षण की भावना से यह अभियान चला रही है। युवाओं और आम लोगों से जुड़ने की अपील संस्था लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण, नदी स्वच्छता, जैव विविधता संवर्धन तथा आदिवासी एवं वंचित बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही है। संस्था ने युवाओं, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और प्रकृति प्रेमियों से अपील की है कि वे अपने आसपास उपलब्ध देशी वृक्षों के बीज एकत्र कर उपयुक्त स्थानों पर बिखेरें। संस्था का कहना है कि यदि हर व्यक्ति हर साल कुछ बीज भी प्रकृति को समर्पित करे, तो आने वाले वर्षों में लाखों नए वृक्ष धरती को हरा-भरा बना सकते हैं।
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बारिश में बीज बिखेरकर हरियाली बढ़ाने की मुहिम:चित्रकूट में 'जल जंगल जुगनू' का अभियान, नीम-जामुन-आम और महुआ के देशी बीज रोपे जा रहे
