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बालोद के राधे सिंह ने राष्ट्रपति भवन में बजाई मोहरी:‘एट होम’ समारोह में गूंजी छत्तीसगढ़ की लोकधुन; लौटे तो ग्रामीणों ने किया सम्मान




बालोद जिले के डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम गुरामी निवासी लोक कलाकार राधे सिंह गंधर्व ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकवाद्य मोहरी का वादन किया। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के विशेष ‘एट होम’ समारोह में यह प्रस्तुति दी। इस समारोह में देशभर से गणमान्य अतिथि उपस्थित थे। राधे सिंह गंधर्व ने मोहरी की धुन छेड़कर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की झलक प्रस्तुत की। उनकी इस प्रस्तुति से बालोद जिले की लोककला को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली। राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर यह प्रस्तुति राधे सिंह की वर्षों की कला साधना का परिणाम है। इसे बालोद की लोककला के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देने के बाद जब राधे सिंह अपने गांव गुरामी लौटे तो ग्रामीणों और क्षेत्र के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। बड़ी संख्या में लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे। गांव की लोककला पहुंची राष्ट्रीय मंच तक राधे सिंह गंधर्व लंबे समय से मोहरी और बांसुरी वादन के जरिए छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे राधे सिंह की कला में छत्तीसगढ़ के लोकजीवन और परंपराओं की झलक मिलती है। राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति का अवसर मिलना उनके लिए ही नहीं, बल्कि डौंडीलोहारा क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवा कलाकारों को भी लोककला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। मोहरी की धुन से छत्तीसगढ़ की संस्कृति की झलक मोहरी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकवाद्यों में शामिल है और लोक आयोजनों में इसका विशेष महत्व रहा है। राधे सिंह ने इसी पारंपरिक वाद्य के जरिए राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत की। उनकी प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि ग्रामीण अंचलों में पीढ़ियों से चली आ रही लोककलाओं में आज भी देश के बड़े मंच पर अपनी जगह बनाने की क्षमता है। गांव लौटे तो ग्रामीणों ने किया स्वागत राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देने के बाद राधे सिंह गंधर्व के गांव गुरामी लौटने पर ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। बड़ी संख्या में लोग उन्हें बधाई देने पहुंचे। ग्रामीणों ने उनकी उपलब्धि को पूरे गांव और डौंडीलोहारा क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे राधे सिंह की इस उपलब्धि ने स्थानीय लोगों में खासा उत्साह पैदा किया है।



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