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समय पर किराया जमा नहीं होने के बाद भी अधिकारी बेखबर बाड़मेर नगर परिषद में अधिकारियों और कर्मचारियों की अनदेखी के चलते केंद्रीय बस स्टैंड पर कियोस्क आवंटन में मनमर्जी का खेल चला है। हालात यह हैं कि आवंटन किसी और जगह का है और कब्जा दूसरी जगह किया गया है। 15 फरवरी 2024 को आवंटी को कियोस्क नंबर 2 दिया गया था, लेकिन उसने कियोस्क नंबर 3 की जगह पर व्यापार शुरू कर दिया। निविदा में तय 1.8×1.8 मीटर की जगह 2.2×2.2 मीटर का बड़ा कियोस्क खड़ा कर लिया गया। बिजली कनेक्शन नगर परिषद आयुक्त के नाम के बजाय आवंटी ने अपने व्यक्तिगत नाम से करवा लिया। निविदा के बिंदु 7 के तहत 30 दिन में काम शुरू करना अनिवार्य था, लेकिन 6 महीने देरी से 4 अगस्त को व्यवसाय शुरू हुआ। वहीं, 3 महीने तक किराया न देने पर लाइसेंस निरस्त करने के नियम के बावजूद राजस्व शाखा ने कोई जब्ती या वसूली कार्रवाई नहीं की। 2024 में आवंटित किए कियोस्क,तीन माह से किराया भी नहीं दिया 2014 से चल रहा है खेल: जुलाई 2014 की नीलामी में कियोस्क-2 योगेश बेनीवाल को मिला था, जिसे 2018 के बाद गोरखाराम को आवंटित किया गया। गोरखाराम ने ही नंबर 3 की जगह कब्जा किया। परिषद ने नोटिस जारी कर हटाने के आदेश भी दिए, लेकिन अतिक्रमण शाखा की ढिलाई से अवैध निर्माण नहीं हटा। नियमित व्यापारी का व्यापार ठप इस मिलीभगत का नुकसान 2014 से नियमित किराया भर रहे कियोस्क नंबर 4 के व्यापारी को हो रहा है। वह अब तक करीब 33.75 लाख रुपए परिषद कोष में जमा करवा चुका है। पीड़ित का आरोप है कि रंजिश के तहत 15 फरवरी 2024 को उसकी दुकान के ठीक आगे गलत कियोस्क खड़ा कर रास्ता रोक दिया गया, जिससे उसका धंधा चौपट हो गया है। अधिकारी का पक्ष अनियमितताओं की सिरे से जांच कर फाइलों का आंकलन किया जाएगा। दोषियों पर कार्रवाई करते हुए कियोस्क निरस्तीकरण के संबंध में सूचित किया जाएगा। -परमवीर दुलार, रेवेन्यू अधिकारी, नगर परिषद बाड़मेर।
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बिना अनुमति बदल दी कियोस्क की साइज:केंद्रीय बस स्टैंड में कियोस्क आवंटन 2 पर, कब्जा 3 नंबर पर जमाया
