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जालंधर जिले में हुई अचानक बेमौसम बारिश ने किसानों और चावल मिल मालिकों (शैलर मालिकों) की समस्याओं को गहरा कर दिया है। बारिश के कारण जालंधर की विभिन्न अनाज मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया है, जिससे फसल में नमी का स्तर सरकारी मानकों से ऊपर चला गया है। नमी बढ़ने से धान के दानों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे खरीद प्रक्रिया पर संकट मंडराने लगा है। हाइब्रिड धान और नमी ने बढ़ाई मिलर्स की टेंशन जालंधर राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन के जिला प्रधान कपिल गर्ग ने चिंता जताते हुए कहा कि मौसम की मार के साथ-साथ मंडियों में आ रही संकर (हाइब्रिड) किस्म की आवक ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस किस्म की मिलिंग (कुटाई) के दौरान चावल टूटने का अनुपात काफी अधिक रहता है। पहले से नमी और अब बारिश के कारण इस धान की मिलिंग करना तकनीकी और आर्थिक, दोनों रूपों से अव्यावहारिक हो गया है। गोदामों में जगह की कमी से ठप हुआ उठान एसोसिएशन ने एक और प्रमुख समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताया कि तैयार चावल के उठान के लिए सरकारी गोदामों में जगह ही उपलब्ध नहीं है। गोदाम खाली न होने के कारण शैलरों में नया स्टॉक रखने की गुंजाइश खत्म हो चुकी है, जिससे मिल मालिक पूरी तरह असमंजस की स्थिति में आ गए हैं। सरकारी हस्तक्षेप की मांग जालंधर राइस इंडस्ट्री एसोसिएशन के जिला प्रधान ने पंजाब सरकार और स्थानीय प्रशासन से गुहार लगाई है कि जमीनी परिस्थितियों को देखते हुए नमी और टूटन (राइस ब्रोकेन्स) के तय मानकों में तुरंत ढील दी जाए।गोदामों से तैयार चावल के जल्द उठान के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो मंडियों में धान की खरीद पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे किसानों और मिल मालिकों के बीच टकराव की स्थिति पैदा होगी।
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बेमौसम बारिश से मंडियों में भीगी फसल:जालंधर राइस इंडस्ट्री एसो ने उठाई तुरंत समाधान की मांग, धान खरीद पर गहराया संकट
