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बैतूल में पिछले साल से 26% कम बारिश:सामान्य बारिश से अभी 17.9 इंच दूर, फसलों को राहत का इंतजार; सोयाबीन-मक्का पर बढ़ी चिंता




बैतूल जिले में इस मानसून अब तक पिछले साल की तुलना में करीब 26 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 11 सितंबर की सुबह तक औसत 631 मिमी यानी 24.8 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 854.5 मिमी यानी 33.6 इंच बारिश हो चुकी थी। इस बार करीब 223.5 मिमी यानी 8.8 इंच बारिश कम हुई है। 6 सितंबर तक जिले की औसत बारिश 24.6 इंच थी। इसके बाद पांच दिनों में इसमें सिर्फ 5.1 मिमी की बढ़ोतरी हुई। बैतूल केंद्र पर रात में 3.2 मिमी बारिश जरूर हुई, लेकिन इतनी बारिश से खेतों में नमी की कमी दूर होना मुश्किल है। सामान्य बारिश से अभी 17.9 इंच दूर जिले की सामान्य औसत बारिश 1083.9 मिमी यानी 42.7 इंच है। अब तक इसका करीब 58 प्रतिशत ही पूरा हुआ है। सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए जिले में अभी करीब 17.9 इंच बारिश और चाहिए। केंद्रवार आंकड़ों में चिचोली में सबसे ज्यादा 848.6 मिमी (33.4 इंच) बारिश हुई है। घोड़ाडोंगरी में 809.9 मिमी (31.9 इंच) और भीमपुर में 733.2 मिमी (28.9 इंच बारिश) दर्ज की गई है। आठनेर में सबसे कम बारिश आठनेर में अब तक सबसे कम 381 मिमी यानी करीब 15 इंच बारिश हुई है। बैतूल केंद्र में 526.2 मिमी (20.7 इंच) और आमला में 528 मिमी (20.8 इंच) बारिश दर्ज की गई है। पिछले साल की तुलना में सबसे ज्यादा कमी भीमपुर में है। यहां पिछले साल 1272 मिमी यानी करीब 50.1 इंच बारिश हुई थी, जबकि इस बार 733.2 मिमी ही हुई है। यानी करीब 21.2 इंच कम बारिश हुई है। अगले पांच दिन बारिश की संभावना मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 11 और 12 सितंबर को बारिश के साथ गरज-चमक हो सकती है। 13 सितंबर को बादल छाए रहने के साथ मध्यम बारिश की संभावना है। 14 और 15 सितंबर को भी बारिश या गरज-चमक के आसार हैं। पांच दिन से बारिश लगभग नहीं होने के बाद अब किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार है। हल्की बारिश से खेतों में नमी की कमी पूरी नहीं होगी। इसके लिए जिले के बड़े हिस्से में अच्छी और लगातार बारिश जरूरी होगी। सोयाबीन-मक्का के लिए सितंबर की बारिश जरूरी बारिश रुकने से खरीफ फसलों पर असर पड़ने की चिंता बढ़ी है। सोयाबीन इस समय फूल, फली बनने और दाना भरने की अवस्था में है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहने पर फलियों और दाने के विकास पर असर पड़ सकता है। मक्का समेत दूसरी वर्षा आधारित फसलों के लिए भी इस समय बारिश जरूरी है। अब यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश होती है तो खेतों की नमी में सुधार हो सकता है। बारिश फिर छिटपुट रही तो फसलों पर दबाव बढ़ सकता है।



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