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बोर्ड ऑफ रेवेन्यू चेयरमैन के बेंच गठन पर रोक:हाईकोर्ट ने यूपी सरकार हलफनामा दे, याचिकाकर्ता जवाब दे




इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू उत्तर प्रदेश के चेयरमैन द्वारा 3 जुलाई और 8 जुलाई 2026 को जारी उन आदेशों पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिनके तहत कई मामलों की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय बेंच गठित करने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रशाद की खंडपीठ ने यह आदेश बोर्ड ऑफ रेवेन्यू बार एसोसिएशन, प्रयागराज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। जानिये क्या है मामला वरिष्ठ अधिवक्ता ने अधिवक्ता उमंग श्रीवास्तव के साथ याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 9 के तहत चेयरमैन को दी गई विवेकाधिकार शक्ति का उपयोग उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली, 2016 के नियम 10, 12 और 13 के विपरीत किया गया है। उनका कहना था कि चेयरमैन केवल किसी विशेष ‘मामले’ या ‘मामलों की श्रेणी’ के लिए बेंच गठित कर सकते हैं, न कि हर उस मामले के लिए जिसमें राज्य सरकार या गांव सभा पक्षकार हो — क्योंकि लगभग हर राजस्व वाद में राज्य स्वाभाविक रूप से पक्षकार होता है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि इस व्यवस्था से मामलों के त्वरित निस्तारण का उद्देश्य पूरा नहीं होता, बल्कि इससे सुनवाई में और देरी होगी और बुधवार को तीन सदस्यीय बेंच व अन्य दिनों में एकल सदस्यीय बेंच के बीच भेदभाव भी उत्पन्न होता है। अपर महाधिवक्ता ने आदेशों का बचाव किया अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने आदेशों का बचाव करते हुए कहा कि धारा 9 के अंतर्गत चेयरमैन को यह तय करने का विवेकाधिकार है कि किन मामलों की सुनवाई बड़ी बेंच द्वारा हो, और यह व्यवस्था लखनऊ व अन्य सर्किट बेंचों में सफलतापूर्वक चल रही है। कोर्ट के एक सवाल पर कि जब तीन सदस्य अलग-अलग बैठकर तीन गुना अधिक मामले निपटा सकते हैं, तो एक साथ बैठाने से शीघ्र निस्तारण कैसे संभव होगा, गोयल ने विस्तृत प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर याचिकाकर्ताओं की दलीलों में दम पाया और कहा कि मामले पर गंभीर विचार की आवश्यकता है। कोर्ट ने बोर्ड ऑफ रेवेन्यू और राज्य सरकार को एक सप्ताह में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने और याचिकाकर्ताओं को उसके बाद एक सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि कोर्ट ने अगले आदेश तक 3 जुलाई और 8 जुलाई 2026 के दोनों विवादित आदेशों के प्रभाव पर रोक लगा दी और चेयरमैन को 24 घंटे के भीतर प्रयागराज, लखनऊ व अन्य सर्किट बेंचों में बेंचों के सुचारू संचालन हेतु आवश्यक आदेश जारी करने का निर्देश दिया।



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