सावन महीने में भगवान शिव की पूजा करने के साथ ही उनकी कथाएं पढ़ना और सुनना भी बहुत शुभ माना जाता है। शिव जी की कथाओं में जीवन को बेहतर बनाने की सीख भी छिपी होती है। ऐसी ही एक कथा हमें बताती है कि धन, पद और सफलता मिलने पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। यह कथा भगवान शिव, गणेश और कुबेर देव से जुड़ी है। कथा के अनुसार, देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव के पास अपार धन-संपत्ति थी। धीरे-धीरे उन्हें अपनी दौलत और पद पर गर्व होने लगा। उन्हें लगने लगा कि उनसे अधिक धनवान और सामर्थ्यवान कोई नहीं है। एक दिन कुबेर देव भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्होंने शिव जी को पूरे परिवार के साथ भोजन करने का निमंत्रण दिया। शिव जी समझ गए थे कि इस निमंत्रण के पीछे भक्ति से ज्यादा कुबेर का अहंकार है। उन्होंने कुबेर को समझाया कि हमें भोजन कराने से ज्यादा अच्छा है कि जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं, लेकिन कुबेर अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि वे सभी को भोजन करा सकते हैं। तब शिव जी ने कहा कि वे स्वयं नहीं आ पाएंगे, लेकिन गणेश को भेज देंगे। साथ ही, उन्होंने बताया कि गणेश जी जल्दी तृप्त नहीं होते है, इस बात का ध्यान रखना। कुबेर ने इसे अपनी ताकत की परीक्षा समझ लिया। उन्होंने गणेश जी के लिए तरह-तरह के पकवान बनवाए। गणेश जी भोजन करने लगे। वे लगातार खाते जा रहे थे, लेकिन उनकी भूख शांत नहीं हुई। देखते ही देखते कुबेर के महल का सारा भोजन समाप्त हो गया। फिर भी गणेश जी की भूख बनी रही। कुबेर घबरा गए। वे तुरंत भगवान शिव के पास पहुंचे और अपनी परेशानी बताई। शिव जी ने माता पार्वती से गणेश जी के लिए भोजन लाने को कहा। इसके बाद माता पार्वती ने प्रेम से गणेश जी को भोजन कराया। वह भोजन पाकर गणेश जी तृप्त हो गए। यह देखकर कुबेर को अपनी गलती समझ आ गई। उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी और संकल्प लिया कि वे कभी अपने धन और पद का घमंड नहीं करेंगे। यह कथा हमें बताती है कि जीवन में सफलता मिले तो घमंड नहीं करना चाहिए, धन और पद कभी स्थायी नहीं होते, लेकिन विनम्रता हमेशा व्यक्ति का सम्मान बढ़ाती है। भगवान गणेश की सीख आपके पास पैसा, अच्छी नौकरी, बड़ा पद या कोई विशेष प्रतिभा है तो इसके लिए खुश रहें, लेकिन दूसरों को छोटा न समझें। याद रखें कि परिस्थितियां कभी भी बदल सकती हैं। इसलिए घमंड न करें। पैसा जीवन की जरूरतें पूरी करता है, लेकिन पैसा ही हमारी पूरी पहचान नहीं है। सच्ची पहचान हमारे अच्छे व्यवहार और अच्छे कर्मों से बनती है। कुबेर की तरह केवल दिखावे के लिए खर्च करने के बजाय जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें। किसी भूखे को भोजन देना, किसी विद्यार्थी की मदद करना या किसी परेशान व्यक्ति का साथ देना बहुत बड़ा काम हो सकता है। सफलता के पीछे परिवार, मित्र, शिक्षक, सहकर्मी और कई लोगों का योगदान होता है। इसलिए अपनी उपलब्धियों के लिए दूसरों का आभार व्यक्त करें। कुबेर को जब अपनी गलती समझ आई, तो उन्होंने क्षमा मांगी। यही अच्छी सोच है। गलती स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है। महंगी चीजें खरीदना या अपनी संपत्ति दिखाना जरूरी नहीं है। सादगी व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है। आप दूसरों से जैसा व्यवहार करेंगे, वैसा ही व्यवहार अक्सर आपको वापस मिलेगा। छोटे-बड़े सभी लोगों से विनम्रता से बात करें। धन कमाने की दौड़ में परिवार और रिश्तों को नजरअंदाज न करें। सुख केवल बैंक खाते में नहीं, बल्कि अच्छे रिश्तों में भी मिलता है। दिन खत्म होने पर कुछ मिनट सोचें कि आज आपने किससे अच्छा व्यवहार किया और कहां गलती हुई। इससे धीरे-धीरे स्वभाव बेहतर होता है। बड़ा व्यक्ति वही है जो बड़ा होकर भी सरल बना रहे। सफलता मिलने के बाद भी जमीन से जुड़े रहना जीवन की सबसे बड़ी खूबी है। धन कमाना गलत नहीं है, लेकिन धन का अहंकार जीवन को कमजोर कर सकता है। सफलता के साथ विनम्रता, सेवा और अच्छे व्यवहार को अपनाएं। यही जीवन को वास्तव में सुखी और सम्मानपूर्ण बनाता है।
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भगवान शिव की कुबेर देव को सीख:धन और पद कभी स्थायी नहीं होते, लेकिन विनम्रता हमेशा व्यक्ति का सम्मान बढ़ाती है, किसी भी स्थिति में घमंड न करें
