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भर्ती परीक्षाओं में धांधली मामले में सीआईडी रेस:डिफॉल्ट बेल न मिले, इसलिए 19 अक्टूबर से पहले दायर होगी चार्जशीट




22 जुलाई को गिरफ्तार किए गए थे घोटाले के पांच प्रमुख आरोपी जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में धांधली और ओएमआर शीट में हेराफेरी मामले में सीआईडी अगले हफ्ते चार्जशीट दायर करेगी। 21 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी के बाद सीआईडी ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर 22 जुलाई को पांच प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था। कानूनी प्रावधानों के तहत गिरफ्तारी के 90 दिन के भीतर आरोपियों को डिफॉल्ट बेल का लाभ न मिल सके, इसके लिए सीआईडी 19 अक्टूबर से पहले हर हाल में चार्जशीट दाखिल करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
इस मामले में बीएनएस की गंभीर धाराओं के साथ-साथ झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम-2023 की धाराएं लगाई गई हैं। सीआईडी ने जांच के दौरान जेपीएससी कार्यालय व परीक्षा एजेंसी के ठिकानों से जब्त ​डिजिटल उपकरणों, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट के आधार पर ठोस तकनीकी व दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए हैं। इन पुख्ता साक्ष्यों के जरिए सीआईडी आरोपियों की भूमिका और साजिश को बेनकाब करेगी। आरोपियों के खिलाफ सीआईडी के पास क्या है ठोस सबूत तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने कहा- वॉट्सएप पर भेजी आंसर-की, एजेंसी ने कराई हवाई यात्रा
श्वेता गुप्ता पर आरोप है कि सिविल सेवा पीटी की आंसर-की प्रकाशित होने से पहले ही वॉट्सएप के जरिए टीडीपीएल के कर्मचारी मो. उस्मान को भेज दी। तबादले के बावजूद आयोग में डटी रहीं और गोपनीय परीक्षा प्रक्रियाओं का संचालन करती रहीं। जनवरी से जून के बीच श्वेता और परिजनों के लिए टीडीपीएल की ओर से रांची से दिल्ली व बेंगलुरू के तीन हवाई टिकट बुक कराए गए। टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने कहा- खाली ओएमआर शीट भरकर पास कराने का मास्टरमाइंड
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह पर आरोप है ​कि उसने चुनिंदा अभ्यर्थियों को केवल वही प्रश्न हल करने को कहा था, जिसका उत्तर पता था। शेष ओएमआर शीट खाली छोड़ने की हिदायत दी थी। बाद में स्कैनिंग के दौरान खाली ओएमआर भरकर अंक बढ़ाए गए। परीक्षा के दौरान वह 36 अभ्यर्थियों से लगातार संपर्क में था। टीडीपीएल का मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी ने कहा- पहले खुद ली नौकरी, फिर खोला पास कराने का दफ्तर
टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी को इस घोटाले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। जांच में पता चला कि उसने परीक्षा एजेंसी का कर्मी रहते हुए खुद फर्जी तरीके से कई परीक्षाएं पास कीं। फिर लोगों को पास कराने का दफ्तर खोल लिया। वह पीटी पास कराने के लिए 5 लाख और अंतिम चयन के लिए 25 लाख तक वसूलता था। टीडीपीएल का कर्मचारी मो. उस्मान ने कहा- श्वेता गुप्ता ने इसे ही भेजी थी आंसर-की
मो. उस्मान टीडीपीएल का कर्मचारी था। आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता से 26 मई को सिविल सेवा पीटी परीक्षा की गोपनीय आंसर-की सीधे अपने मोबाइल पर हासिल की। एजेंसी के लालपुर स्थित आवासीय परिसर से जब्त कंप्यूटरों में एफआरओ मेन्स परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाएं पाई गई थीं। टीडीपीएल का कर्मचारी मो. एबाद ने कहा – जेपीएससी ऑफिस से घर ले गया कॉपियां
मो. एबाद टीडीपीएल का कर्मचारी था। मो. एबाद ने मो. उस्मान के साथ मिलकर जेपीएससी कार्यालय से गोपनीय परीक्षा सामग्री, एफआरओ मेन्स परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को एजेंसी के लालपुर स्थित निजी आवास तक पहुंचाने और सिस्टम में फीड करने का काम किया। जबकि इसे आयोग से बाहर नहीं ले जाया जा सकता। अपने घर पर 35 अभ्यर्थियों को रटवाया था, गिरफ्तार
सीआईडी ने सीजीएल परीक्षा में धांधली मामले में दुग्धा के न्यू बीसीसीएल कॉलोनी निवासी अप्राथमिकी अभियुक्त सुरेश राय काे गिरफ्तार किया है। सुरेश इस मामले में जेल जा चुके उमेश राय का पिता है। सीआईडी जांच में पता चला है कि सुरेश राय के दुग्धा स्थित आवास पर ही 35 अभ्य​ि​र्थयों को जुटाया गया था। उन्हें प्रश्न-उत्तर रटवाए गए थे। उसके खिलाफ सेटिंग कर पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे वसूलने के भी पुख्ता सबूत मिले हैं।



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