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भिवानी जिले में सूखे को लेकर यहां के किसानों में भारी रोष है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। इसे लेकर वीरवार को अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले किसानों ने डीसी ऑफिस के बार धरना दिया और सरकार को चेतावनी दी कि अगर दो-तीन दिन में उनकी मांगें नहीं मानी गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अपनी मांगों को लेकर किसानों ने डीसी के मार्फत मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है। धरने पर किसान नेता दयानंद ने बताया कि पूरा भिवानी जिला सूखे की चपेट में है। सिवानी और तोशाम क्षेत्र की हालत सबसे ज्यादा भयंकर है। नहरों में पानी नहीं है, जिससे पकने वाली फसल 2-3 दिन में सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। पशुओं के चारे के दाम 1000 रुपये से ऊपर पहुंच गए हैं। ये रखी चार मांगे
वहीं किसान सभा ने सरकार से चार मांगें रखी हैं। भिवानी जिले को तुरंत सूखाग्रस्त घोषित किया जाए। 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। नहरों में पानी और खाद की व्यवस्था की जाए और टावर लाइन के नाम पर किसानों के साथ हो रही धक्काशाही पर रोक लगाई जाए। पिछली बार बाढ़ तो इस बार सूखे की मार किसान नेता मास्टर जगरोशन, कामरेड ओमप्रकाश ने बताया कि जिले में बहुत भयंकर सूखा पड़ा हुआ है। इसलिए सरकार तुंरत क्षतिपूर्ति पोर्टल खोले। इससे पहले मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल को भी खोला जाए। विशेष गिरदावरी करवाई जाए और 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि पिछली बार बाढ़ की मार थी, इस बार सूखे की मार है। कम रेट में बिक रहा बाजारा, किसानों को नुकसान किसान नेता ने कहा कि खड़े किए जा रहे टॉवरों का किसानों को न्यायोचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मंडी में बाजरा 2250 से 2300 बिक रहा है, जबकि इसका भाव 2929 है और इससे किसानों को 600-650 का नुकसान हो रहा है। किसान सभा ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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भिवानी को सूखाग्रस्त करने की मांग पर किसानों का प्रदर्शन:नहरों में पानी नहीं, सूखने के कगार पर फसल, महंगा हुआ चारा
