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हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में प्राकृतिक आपदा के दौरान मोबाइल नेटवर्क और अन्य संचार सेवाएं बाधित होने पर हैम रेडियो प्रभावी वैकल्पिक माध्यम साबित हो सकता है। यह बात उपायुक्त अपूर्व देवगन ने मंडी के डीआरडीए सभागार में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन कही। हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मंडी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण का विषय ‘हैम रेडियो- आपातकालीन स्थितियों और आपदाओं के दौरान वैकल्पिक संचार’ रखा गया है। डीसी ने बताया कि हैम रेडियो के जरिए मोबाइल नेटवर्क के बिना भी जरूरी संदेशों का आदान-प्रदान किया जा सकता है। उपायुक्त ने संचार क्षमता का प्रत्यक्ष परीक्षण भी किया उपायुक्त ने बगला पहुंचकर हैम रेडियो का संचालन भी किया और इसकी कार्यप्रणाली व संचार क्षमता का प्रत्यक्ष परीक्षण किया। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण में हासिल तकनीकी ज्ञान का उपयोग आपदा के समय प्रभावी ढंग से करने का आह्वान किया। प्रशिक्षण में प्रदेश के छह जिलों से 35 लाइसेंसधारी प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। दूसरे दिन प्रतिभागियों को विभिन्न प्रकार के एंटीना, उनकी कार्यप्रणाली और एंटीना की ऊंचाई व दिशा का संचार पर पड़ने वाले प्रभाव की जानकारी दी गई। इसके अलावा एचएफ, वीएचएफ और यूएचएफ बैंड में रेडियो तरंगों के प्रसार, लंबी दूरी और लाइन-ऑफ-साइट संचार का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों ने फील्ड एंटीना स्थापित करने, रेडियो नेट संचालित करने, नेट कंट्रोल स्टेशन की भूमिका और आपातकालीन संदेशों को व्यवस्थित तरीके से रिले करने का अभ्यास भी किया। प्रशिक्षक नीलकंठ चटर्जी, विल्किस वॉल्टर जैम्स और सयानी डे ने प्रशिक्षण दिया।
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मंडी में 6 जिलों के 35 लोगों को मिला प्रशिक्षण:आपदा में मोबाइल नेटवर्क बंद होने पर, हैम रेडियो बनेगा लाइफलाइन
