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मामूली विवाद को 'तो' ने बनाया बड़ा मुद्दा:जींद में कर्मचारियों- वकीलों की वार्ता तोड़ी; जानिए बिजली कर्मी- वकील विवाद की इनसाइड स्टोरी




जींद में ‘तो’ शब्द ने बिजली कर्मचारी और वकील विवाद को बड़ा मुद्दा बना दिया है। वकील ने एसडीओ समेत 5 बिजली कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। भाकियू ने ग्रामीणों को साथ लेकर हाट गांव के पॉवर हाउस पर धरना शुरू कर दिया। जिसके बाद बिजली कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी आरोपी कर्मियों को साथ लेकर बार पदाधिकारियों से बातचीत के लिए सफीदों बार पहुंचे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जब बात माफी मांगने पर आई तो बिजली कर्मचारियों ने माफी से पहले तो शब्द लगा दिया। बार पदाधिकारियों को बिजली कर्मचारियों के काफी मांगने का यह तरीका पसंद नहीं आया और समझौता वार्ता की टेबल का छोड़ दिया। भाकियू व ग्रामीणों के धरने में प्रदेश में आंदोलन चर्चित चेहरों के शामिल होने से अब छोटा सा विवाद बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। जानिए कैसे बिगड़ी बात वकील प्रवीण बूरा की शिकायत पर सफीदों पुलिस ने एसडीओ व दो जेई समेत पांच कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। भाकियू के साथ शिकायतकर्ता वकील को बार का साथ मिला। कर्मचारी यूनियन भी कर्मचारियेां के समर्थन में उतरी। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी से यूनियन ने बातचीत से मामले को निपटाने की पहल की। आरोपी कर्मचारियों को साथ लेकर यूनियन का प्रतिनिधिमंडल सफीदों बार पहुंचा। जहां दोनों ने अपना-अपना पक्ष रखा। अंत में मामला खत्म करने के लिए बिजली कर्मचारियों के सामने माफी मांगने का प्रस्ताव रखा। जिस पर बिजली कर्मचारियों ने माफी मांगते हुए कहा कि यदि गलती की है तो हम माफी मांगते है। माफी से पहले लगाए गए तो शब्द लगाना बार के प्रतिनिधिमंडल को रास नहीं आया और समझौता वार्ता को वहीं पर रोक दिया। जानिए अब तक क्या हुआ वकील प्रवीण बूरा ने 16 सितंबर की रात बिजली कर्मचारियों पर मारपीट के आरोप लगाए। 17 सितंबर को खानपुर मेडिकल कॉलेज में वकील का मेडिकल हुआ। जिसके बाद पुलिस को लिखित शिकायत दी गई। सफीदों पुलिस ने एसडीओ समेत 5 कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज किया। 20 सितंबर को भाकियू और ग्रामीणों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर गांव हाट के पॉवर हाउस के बाहर धरना शुरू किया। 23 सितंबर को पुलिस ने लाइनमैन रवि को गिरफ्तार किया। जिसके विरोध में बिजली कर्मचारी प्लास व पैन डाउन हड़ताल पर चले गए। 25 सितंबर को धरने में प्रदेश में आंदोलन के बड़े चेहरे बन चुके सुरेश कोथ और अभिमन्यु कोहड़ की एंट्री हुई। 28 सितंबर को भाकियू और ग्रामीणों ने सफीदों एसडीएम कार्यालय का घेराव किया। बार ने पहले 25 और फिर 28-29 सितंबर को अधिवक्ता प्रवीण बूरा के समर्थन में वर्क सस्पेंड रखा। जानिए क्या था मामला वकील प्रवीण बूरा ने पुलिस को शिकायत दी। जिसमें आरोप लगाया कि 16 सितंबर की रात वह गांव के पॉवर हाउस में अपनी शिकायत दर्ज करवाने गया था। इसी दौरान वहां मौजूद कर्मचारियें ने मामूली विवाद के चलते उसकी पिटाई कर दी। जानिए किसने क्या कहा मामले की सच्चाई क्या है यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगी। इस मामले में दोनों पक्षों के अपने अपने दावे हैं। दोनों ही पक्ष खुद के पीड़त होने का दावा कर रहे हैं। जानिए किसने क्या कहा:- गलती भी नहीं मानी:- सफीदों बार प्रधान पुरुषोत्तम राणा ने कहा कि कर्मचारी यूनियन बातचीत के लिए हमारे पास आई थी। हमारी साथी वकील प्रवीण बूरा को बुरी तरह पीटा गया। जिसकी पुष्टि मेडिकल जांच में हुई है। हम भी बातचीत से मामले को निपटाने के पक्ष में थे। बातचीत के बाद हमने आरोपियों को इसके लिए मौका भी दिया, परंतु वो अपनी गलती मानने को तैयार नहीं थे। माफी मांगते हुए कहा कि हमने गलती की हो तो माफी मांगते है। यह रवैया ऐसा था मानों उन्होंने कुछ किया ही नहीं। जिसे देखते हुए हमने बातचीत को रोक दिया। खुद कार में बिठाया:- यूनिट प्रधान नरेश देशवाल व पदाधिकारी सुरेश खर्ब ने बताया कि इस मामले को राजनीतिक रंग दिया गया है। वकील प्रवीण बूरा रात को सफीदों से आते हुए पॉवर हाउस आए। एसए मनीष ने उन्हें समझाकर घर भेज दिया। इसके बाद दोबारा आए और दरवाजा पीटने लगे। दरवाजा खोलते ही कर्मचारी के साथ गाली-गलौच कर मारपीट शुरू कर दी। इससे पहले भी वकील प्रवीण बूरा ऐसा कर चुके थे। जिसकी शिकायत पुलिस को भी दी गई थी। बातचीत के बाद मामले को निपटा दिया जाता था। 16 सितंबर की रात भी कर्मचारियों ने अपने साथ हुई मारपीट को गंभीरता से नहीं लिया। पिटने के बाद भी एसए खुद उन्हें गाड़ी तो छोड़कर आए और वह खुद गाड़ी चलाकर घर गए। 17 सितंबर की दोपहर उन्होंने अचानक खानपुर मेडिकल कॉलेज जाकर अपना मेडिकल बनवा लिया। ग्रामीण बोले- दोषियों को पकड़े:- धरने की अगुवाई कर रहे नवीन मलिक ने कहा कि हम केवल यह चाहते हैं कि वकील के साथ मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी हो। मुख्य आरोपियों में से एक गिरफ्तार हो चुका है, जबकि दूसरा अभी भी खुला घूम रहा है। जहां तक एसडीओ जेई का सवाल है तो पुलिस पहले उनकी बातचीत और फोन लोकेशन की जांच करें। यदि बातचीत और लोकेशन में उनकी संलिप्ता सामने आती है तो उन्हें भी गिरफ्तार किया जाए।



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