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मिथिला क्षेत्र में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए केंद्र सरकार काम कर रही है। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी के पत्र का हवाला देते हुए सांसद डॉ. गोपालजी ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। बाढ़ प्रबंधन, जल-जमाव वाले क्षेत्रों से जल निकासी, जलवायु प्रतिरोधी जल अवसंरचना के निर्माण एवं रखरखाव के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध कराई गई है और योजनाओं पर तेजी से अमल किया जा रहा है। 22 मार्च 2026 को दरभंगा जिले में हर वर्ष बाढ़ से होने वाले नुकसान और जल निकासी की समस्या को लेकर केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर स्थायी समाधान की मांग की थी। इसके जवाब में केंद्रीय राज्यमंत्री ने जानकारी दी है कि बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 48 परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने 943.81 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। जिसमें दरभंगा भी शामिल है। 43 परियोजनाएं पूरी, चार पर काम जारी सांसद ने बताया कि स्वीकृत 48 परियोजनाओं में से 43 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि चार परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। इन योजनाओं का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। मिथिला क्षेत्र में नौ परियोजनाएं डॉ. गोपालजी ठाकुर ने बताया कि दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर जिले को शामिल करने वाले मिथिला क्षेत्र में 94.124 करोड़ रुपए की लागत से बाढ़ प्रबंधन की सात परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि दो परियोजनाओं पर कार्य जारी है। इन योजनाओं से करीब 7.90 लाख हेक्टेयर भूमि को बाढ़ से सुरक्षा मिली है, जिससे लगभग 39.20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बाढ़ पूर्व चेतावनी तंत्र भी मजबूत सांसद ने कहा कि केंद्र सरकार ने मिथिला क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर बाढ़ निगरानी एवं पूर्व चेतावनी से जुड़े स्टेशन भी स्थापित किए हैं। इनके माध्यम से नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार की इन योजनाओं से मिथिला क्षेत्र में बाढ़ नियंत्रण, जल संसाधन विकास और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में लोगों को बाढ़ की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
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मिथिला में बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए ठोस पहल:7 परियोजनाएं पूरी, 2 पर चल रहा काम; गोपालजी ठाकुर बोले- सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी
