![]()
मेट्रो की ‘ड्राइंग’ जनप्रतिनिधियों की समझ से ही बाहर हैं। मंगलवार को गोयल नगर, तिलक नगर, सांई नाथ कॉलोनी और आसपास के रहवासी मंगलवार को नगर निगम मुख्यालय पहुंचे और प्रस्तावित अलाइनमेंट पर आपत्ति जताई। रहवासियों ने महापौर, मेट्रो के अधिकारियों के साथ बैठक की। एमआईसी सदस्य ने बताया कि रहवासियों ने समस्या और आशंकाओं को मेट्रो के अधिकारियों के सामने रखा, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। रहवासियों ने ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि घनी आबादी वाले इलाकों में निजी मकानों के नीचे से मेट्रो टनल ले जाने की योजना से हजारों परिवारों को परेशानी होगी। रहवासियों का दावा है कि प्रस्तावित रूट से क्षेत्र के करीब 4 से 6 हजार मकानों पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि कितने मकान वास्तव में प्रभावित होंगे, यह अभी मेट्रो अधिकारियों की ओर से स्पष्ट नहीं किया गया है। इसी मुद्दे को लेकर मंगलवार को हुई बैठक में भी रहवासियों ने अधिकारियों के सामने सवाल रखे। MIC सदस्य बोले- सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिले बैठक में शामिल MIC सदस्य राजेश उदावत ने कहा कि मेट्रो परियोजना को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक में यह समझने का प्रयास किया गया कि मेट्रो किन क्षेत्रों से और कितने मकानों के बीच से गुजरेगी। रहवासियों की सभी आशंकाओं को अधिकारियों के सामने रखा गया, लेकिन उनके मुताबिक सवालों के संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं मिले। उदावत ने कहा कि कई मकान 40, 50 और 60 साल पुराने हैं, जबकि कुछ सोसायटियां 60-70 वर्ष पुरानी हैं। ऐसे में यदि निर्माण के दौरान किसी मकान की संरचना प्रभावित होती है, तो जिम्मेदारी किसकी होगी और नुकसान की भरपाई किस तरह होगी, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए। अगर किसी मकान की संरचना प्रभावित होती है या किसी व्यक्ति की जान को खतरा होता है तो केवल मुआवजा पर्याप्त नहीं है। हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। वास्तव में कितने मकान प्रभावित होंगे, क्योंकि पहले मेट्रो अधिकारियों को पूरी स्थिति सामने रखनी चाहिए।
अधूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे अधिकारी
MIC सदस्य ने मेट्रो अधिकारियों की तैयारी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अधिकारी आधी-अधूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं। उनका आग्रह है कि अधिकारी जनता के बीच जाकर प्रस्तावित योजना की पूरी जानकारी दें और लोगों की आशंकाओं का तकनीकी जवाब दें। रहवासियों ने कनाड़िया रोड के नीचे से मेट्रो ले जाने समेत कई वैकल्पिक मार्गों पर विचार करने की मांग की है। टेलीफोन नगर, अजय नगर, मनीषपुरी, पत्रकार कॉलोनी चौराहा, पलासिया, पिपलियाहाना और व्हाइट चर्च रोड की ओर से विकल्प तलाशने का सुझाव भी दिया गया है।
रहवासी बोले- मेट्रो के खिलाफ नहीं, रूट के खिलाफ रहवासी राजेश ने कहा कि उनका विरोध मेट्रो परियोजना से नहीं है। विरोध उस रूट को लेकर है, जिससे हजारों घर प्रभावित होने की आशंका है। दावा है कि करीब 4 से 6 हजार मकानों पर गंभीर असर पड़ सकता है। नलकूप, ड्रेनेज लाइन और लोगों के सामान्य आवागमन को लेकर भी चिंता है। टनल निर्माण के दौरान भूजल स्तर पर क्या असर पड़ेगा। क्षेत्र के कई परिवार बोरवेल और स्थानीय जलस्रोतों पर निर्भर हैं। यदि निर्माण से जल संरचना प्रभावित होती है तो भविष्य में पानी की समस्या बढ़ सकती है। गजट में एलिवेटेड कॉरिडोर, फिर अंडरग्राउंड क्यों गोयल नगर के रहवासी विकास मिश्रा ने बताया कि भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन में बंगाली चौराहे से पलासिया तक के मेट्रो कॉरिडोर को एलिवेटेड कॉरिडोर के रूप में स्वीकृत किया गया था। लेकिन इसे बाद में अंडरग्राउंड करने का निर्णय लिया गया। यदि पहले एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए सर्वे और स्वीकृति हो चुकी थी, तो बदलाव का तकनीकी आधार और आवश्यकता जनता के सामने रखी जानी चाहिए। वर्तमान अंडरग्राउंड परियोजना की लागत पहले के एलिवेटेड विकल्प की तुलना में करीब चार गुना अधिक हो गई है। रहवासियों की मांग है कि पहले से स्वीकृत विकल्प की व्यवहारिकता की दोबारा समीक्षा की जाए। रूट बदला तो गजट में संशोधन भी संभव रहवासी मनोज ने कहा कि उनका सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहले प्रस्तावित रूट को आखिर किन कारणों से बदला गया। यदि बदलाव के पीछे तकनीकी या प्रशासनिक कारण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि वर्तमान अलाइनमेंट से जनता को परेशानी हो रही है तो सरकार को वैकल्पिक मार्गों पर विचार करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर गजट नोटिफिकेशन में संशोधन भी किया जा सकता है। रहवासियों की मांग- विकास हो, लेकिन सुरक्षा के साथ रहवासियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं। उनकी मांग है कि मेट्रो जैसी बड़ी परियोजना को जनता के साथ संवाद कर आगे बढ़ाया जाए तकनीकी व्यवहार्यता, लागत, सुरक्षा, भूजल, पुराने मकानों की संरचना और भविष्य के प्रभाव का स्वतंत्र अध्ययन होना चाहिए। रहवासियों की मंगलवार शाम को तिलक नगर कम्युनिटी हॉल में भी बैठक हुई।
Source link
मेट्रो की ‘ड्राइंग’ जनप्रतिनिधियों की समझ से बाहर:MIC सदस्य बोले- अधिकारियों ने नहीं दिए संतोषजनक जवाब; 4-6 हजार मकानों पर असर की आशंका
