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यमुनानगर के व्यासपुर क्षेत्र के गांव रसूलपुर में खेतों में बने एक बंद कमरे के रोशनदान में 11 फीट लंबा और करीब 45 किलो वजनी अजगर लगभग 10 दिन तक फंसा रहा। बाहर निकलने की कोशिश में उसकी हालत ऐसी हो गई कि रोशनदान में लगी लोहे की ग्रिल दो जगह उसके पेट में करीब तीन-तीन इंच तक धंस गई। कई दिनों तक दर्द सहने के कारण अजगर कमजोर हो चुका था। खेत मालिक ने जब कमरे में जाकर देखा तो रोशनदान में फंसे विशाल अजगर को देखकर हैरान रह गया। उसने तुरंत वाइल्ड लाइफ विभाग को सूचना दी। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने पांच घंटे से ज्यादा की मशक्कत के बाद रोशनदान और लोहे की ग्रिल को काटकर अजगर को सुरक्षित बाहर निकाला। उपचार देने के बाद उसे कलेसर के जंगल में छोड़ दिया गया। खेत मालिक कई दिन बाद पहुंचा तो रोशनदान में फंसा मिला अजगर खेत मालिक गुरदीप ने बताया कि वह हरियाणा पुलिस में तैनात है। ड्यूटी के कारण खेतों में उसका आना-जाना कम होता है। कई दिनों बाद जब वह खेतों में बने कमरे को देखने पहुंचा तो दरवाजे के ऊपर बने रोशनदान में एक विशाल अजगर फंसा हुआ दिखाई दिया। अजगर लोहे की ग्रिल में बुरी तरह उलझा हुआ था और खुद को बाहर निकालने में असमर्थ था। उसने तुरंत वाइल्ड लाइफ को सूचित किया। छेनी-हथौड़े से तोड़ा रोशनदान, ग्रिल काटकर निकाला वाइल्ड लाइफ विभाग की टीम सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची। रेस्क्यू के लिए पहुंचे विभाग के कर्मचारी मोहित ने बताया कि अजगर दरवाजे के ऊपर बने रोशनदान में लगी लोहे की ग्रिल में फंसा हुआ था। उसे सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पहले छेनी और हथौड़े की मदद से रोशनदान को तोड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद ग्रिल को बाहर निकाला गया। अजगर उसी ग्रिल से लिपटा हुआ था। जब टीम ने ध्यान से जांच की तो पता चला कि ग्रिल के दो हिस्से अजगर के पेट में करीब तीन-तीन इंच तक धंसे हुए थे। लंबे समय से फंसे रहने के कारण अजगर की हालत भी कमजोर हो गई थी। ऐसे में उसे बाहर निकालने के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ी, ताकि उसकी चोट और गंभीर न हो जाए। ब्लेड से काटी ग्रिल, पांच घंटे बाद मिली राहत मोहित के अनुसार, अजगर को ग्रिल से मुक्त करने के लिए टीम ने सावधानीपूर्वक ब्लेड की मदद से लोहे की ग्रिल को काटना शुरू किया। ग्रिल अजगर के शरीर में धंसी हुई थी, इसलिए उसे निकालना आसान नहीं था। टीम ने धीरे-धीरे ग्रिल को काटकर अजगर को उससे अलग किया। इस पूरी प्रक्रिया में पांच घंटे से अधिक समय लग गया। करीब 10 दिन तक रोशनदान में फंसे रहने और पेट में लोहे की ग्रिल धंसने से अजगर काफी सुस्त हो चुका था। टीम ने उसे सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उपचार दिया। इसके बाद उसे प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ने के उद्देश्य से कलेसर के जंगल में छोड़ दिया गया।
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यमुनानगर में अजगर के पेट में घुसी लोहे की ग्रिलें:10 दिन तक रोशनदान में फंसा रहा, 5 घंटे से ज्यादा चला रेस्क्यू ऑपरेशन
