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यूपीएससी में 13वीं रैंक से लेकर IAS तक का सफर:झज्जर में डीसी रह चुकीं सोनल गोयल ने सफलता, प्रशासन, युवा शक्ति, महिला सशक्तिकरण और फिटनेस पर साझा किए अनुभव




झज्जर में DC रह चुकी, यूपीएससी में इंडिय लेवल पर 13वीं रैंक हासिल कर 2008 बैच की त्रिपुरा कैडर की आईएएस अधिकारी सोनल गोयल ने दैनिक भास्कर डिजिटल से विशेष बातचीत में प्रशासन, युवा शक्ति, महिला सशक्तिकरण, फिटनेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सामाजिक माध्यमों को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य, अनुशासन और निरंतर प्रयास जरूरी हैं। असफलता को अंत नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानना चाहिए। असफलता से सीखना जरूरी सोनल गोयल ने कहा कि बड़े लक्ष्य के लिए स्पष्ट दिशा और लगातार मेहनत जरूरी है। असफलता के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण कर रणनीति में बदलाव करना चाहिए। उनके अनुसार असफलता को झटका मानने के बजाय उससे मिलने वाली सीख के रूप में देखना व्यक्ति को बेहतर बनाने में मदद करता है। प्रशासन में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच जरूरी हरियाण में झज्जर के साथ त्रिपुरा के दूरदराज और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने के अनुभव पर उन्होंने कहा कि प्रशासन केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है। लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रभावी प्रशासन की पहचान है। युवा शक्ति से बनेगा विकसित भारत विकसित भारत के निर्माण में युवाओं को अहम बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की बड़ी ताकत है। युवाओं को शिक्षा, कौशल, रोजगार और नेतृत्व के अवसर देने के साथ उनकी ऊर्जा और नई सोच को सही दिशा देना जरूरी है। युवाओं को लगातार नए कौशल सीखकर राष्ट्र निर्माण में भागीदारी करनी चाहिए। महिलाओं को नेतृत्व के अवसर मिलें महिला सशक्तिकरण पर सोनल गोयल ने कहा कि महिलाओं को समान अवसर देने के साथ निर्णय लेने और नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ने के अवसर भी मिलने चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज और प्रशासन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। फिटनेस ने बढ़ाया आत्मविश्वास सोनल गोयल ने अपनी फिटनेस यात्रा भी साझा की। उन्होंने बताया कि एक समय खुद को गैर-खिलाड़ी मानती थीं, लेकिन पिछले दो वर्षों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मैराथन में हिस्सा लेना शुरू किया। इसके बाद एवरेस्ट बेस कैंप की पदयात्रा और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसी चुनौतीपूर्ण यात्राएं भी पूरी कीं। उन्होंने कहा कि फिटनेस ने उन्हें शारीरिक मजबूती के साथ अनुशासन, धैर्य और मानसिक मजबूती भी दी। नई शुरुआत के लिए उम्र या शुरुआती परिस्थितियां बाधा नहीं होनी चाहिए। युद्ध नहीं जिनके जीवन में’ से जीवन का संदेश श्री अर्जुन सिसोदिया की कविता ‘युद्ध नहीं जिनके जीवन में के संदर्भ में उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में अपनी चुनौतियां होती हैं। परिस्थितियों से सीखते हुए खुद को लगातार बेहतर बनाना ही आगे बढ़ने का रास्ता है। तकनीक के साथ संवेदनाएं जरूरी कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक पर सोनल गोयल ने कहा कि युवाओं को बदलती तकनीक के साथ खुद को लगातार अद्यतन करना चाहिए। तकनीक शिक्षा, रोजगार और नए अवसरों को बढ़ा रही है, लेकिन इसका इस्तेमाल मानवीय संवेदनाओं और नैतिक जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए। सामाजिक माध्यमों का संतुलित उपयोग उन्होंने कहा कि सामाजिक माध्यम ज्ञान, सीखने और अवसरों का अच्छा माध्यम हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल में विवेक और संतुलन जरूरी है। डिजिटल दुनिया का उपयोग व्यक्तिगत विकास और सकारात्मक बदलाव के लिए किया जाना चाहिए। आज के डिजिटल युग में दैनिक भास्कर जिस तरह डिजिटल अंदाज में विश्वसनीय और सत्यापित खबरें पाठकों तक पहुंचा रहा है, यह निश्चित रूप से सराहनीय प्रयास है। सोनल गोयल ने कहा कि व्यक्तिगत सफलता का वास्तविक महत्व तब बढ़ता है, जब व्यक्ति अपने अनुभव और क्षमताओं का उपयोग समाज और राष्ट्र के विकास में भी करे।



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