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रतलाम में साइबर ठगी के दो मामले:कृषि उपकरण डीलरशिप के नाम पर 30 हजार ठगे, ज्वेलरी शॉप कर्मचारी के खाते से 43,800 रुपए उड़ाए




रतलाम में साइबर अपराध को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद लोग ऑनलाइन ठगों के जाल में फंस रहे हैं। रतलाम में साइबर फ्रॉड के दो नए मामले सामने आए हैं। एक मामले में कृषि उपकरण की डीलरशिप दिलाने के नाम पर फोटो स्टूडियो संचालक से 30 हजार रुपए ठग लिए गए, जबकि दूसरे मामले में ज्वेलरी शॉप पर काम करने वाले युवक के बैंक खाते से 43,800 रुपए ऑनलाइन निकाल लिए गए। दोनों मामलों में पीड़ितों ने पुलिस से शिकायत की है। पुलिस ने एक मामले में अज्ञात आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि दूसरे मामले में साइबर सेल शिकायत की जांच कर रही है। कृषि उपकरण की डीलरशिप के नाम पर आया मैसेज पहला मामला दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र का है। VIP नगर निवासी सिद्धार्थ कुमार फोटो स्टूडियो संचालित करते हैं। सिद्धार्थ के मोबाइल पर एक मैसेज आया, जिसमें खुद को ‘क्लस्टर कार्यालय जयसिंग महाराज ग्रामीण कृषि समर्थन कार्यक्रम’ के नाम से बताया गया। मैसेज में कृषि उपकरण की डीलरशिप के रजिस्ट्रेशन का ऑफर दिया गया था। इसके बाद उन्हें कॉल किया गया और डीलरशिप के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही गई। कथित तौर पर आरोपियों ने उन्हें एक QR कोड और PhonePe नंबर भेजा। रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर जमा कराए 30 हजार सिद्धार्थ के अनुसार, फोन करने वाले व्यक्ति ने बताया कि डीलरशिप रजिस्ट्रेशन के लिए 30 हजार रुपए जमा करने होंगे। साथ ही यह भरोसा दिलाया गया कि कंपनी से कारोबार बंद करने पर यह रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद उनसे बार-बार रजिस्ट्रेशन के नाम पर भुगतान करने के लिए कहा गया। पीड़ित ने बताया कि उसने संबंधित कंपनी की जानकारी गूगल पर सर्च की और जांच-पड़ताल करने के बाद उसे यह ऑफर वास्तविक लगा। इसके बाद 16 जून को उसने 30 हजार रुपए PhonePe के जरिए भेज दिए। WhatsApp पर भेजा डीलरशिप का फॉर्म रुपए भेजने के बाद कथित कंपनी की ओर से WhatsApp पर डीलरशिप का फॉर्म भेजा गया। सिद्धार्थ ने फॉर्म की PDF निकालकर उसे भरा और वापस उसी मोबाइल नंबर पर भेज दिया। इसके बावजूद उनका डीलरशिप रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ। जब उन्होंने संबंधित नंबर पर दोबारा कॉल किया तो भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्हें ठगी का संदेह हुआ। 1930 पर की शिकायत, थाने पहुंचा मामला साइबर ठगी का पता चलने के बाद सिद्धार्थ ने तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की।शिकायत के आधार पर मामला दीनदयाल नगर थाने पहुंचा। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब भुगतान के लिए इस्तेमाल किए गए नंबर, QR कोड और बैंकिंग ट्रांजैक्शन से जुड़े विवरण के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। दूसरे मामले में खाते से निकले 43,800 रुपए साइबर ठगी का दूसरा मामला माणकचौक थाना क्षेत्र का है। चांदनी चौक स्थित ज्वेलरी शॉप पर काम करने वाले 35 वर्षीय पंकज कुमार, निवासी ब्राह्मणों का वास, ने पुलिस को शिकायत दी है।पंकज के मुताबिक, 6 अगस्त को दोपहर करीब 3:27 बजे उनके HDFC बैंक खाते से Google Pay के जरिए 43,800 रुपए निकाल लिए गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस समय खाते से पैसे कटे, उस समय मोबाइल फोन पंकज के पास ही था। मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया, फिर भी खाते से कटे रुपए पंकज ने बताया कि जिस समय खाते से रकम निकली, उन्होंने मोबाइल पर कोई ट्रांजैक्शन नहीं किया था। उन्हें इस घटना का पता बाद में चला। शाम को जब उन्होंने अपने दोस्त के खाते में रुपए भेजने की कोशिश की तो उन्हें बैंक खाते में पर्याप्त राशि नहीं मिली। खाता चेक करने पर पता चला कि उसमें सिर्फ 64 रुपए बचे थे, जबकि इससे पहले खाते में करीब 43,864 रुपए मौजूद थे। साइबर सेल कर रही मामले की जांच घटना के बाद पंकज ने रतलाम साइबर सेल में शिकायत की है। पुलिस खाते से हुए ट्रांजैक्शन, Google Pay से जुड़े विवरण और रकम जिस खाते में गई है, उसकी जानकारी जुटा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि रकम किस तरीके से निकाली गई और आरोपी ने खाते तक कैसे पहुंच बनाई। दोनों मामलों में अलग तरीका, निशाना ऑनलाइन भरोसा रतलाम में सामने आए दोनों मामलों में साइबर ठगी का तरीका अलग है। पहले मामले में ठगों ने डीलरशिप और रजिस्ट्रेशन के नाम पर भरोसा कायम कर QR कोड के जरिए भुगतान कराया, जबकि दूसरे मामले में पीड़ित के खाते से बिना उसकी जानकारी के रकम निकल गई। इन घटनाओं से एक बार फिर साफ है कि साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं। किसी भी अनजान लिंक, QR कोड, फोन कॉल या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। जांच के बाद सामने आएगी ठगी की पूरी तस्वीर फिलहाल दोनों मामलों में पुलिस जांच कर रही है। दीनदयाल नगर पुलिस डीलरशिप के नाम पर हुई ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर और भुगतान की जानकारी खंगाल रही है, जबकि माणकचौक क्षेत्र के मामले में साइबर सेल खाते से निकली रकम के ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ठगी के पीछे कौन लोग हैं और पीड़ितों की रकम किस माध्यम से निकाली गई।



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