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राजस्थान कॉलेज एजुकेशन में नई नियुक्तियों पर लगाई अंतरिम रोक:हाईकोर्ट ने कहा- शिक्षकों को हटाकर नए लोगों की नियुक्ति करना शोषण का कारण बन रहा




राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के तहत की जा रही भर्तियों और प्रत्येक शैक्षणिक सत्र के बाद प्राध्यापकों की सेवाएं समाप्त कर नई नियुक्तियां करने की प्रक्रिया पर सख्ती दिखाई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राज्य सरकार के जवाब पर असंतोष जताते हुए राजसेस के तहत जारी भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने कहा- गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा- उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में राजपत्रित पदों पर इस प्रकार संविदात्मक नियुक्तियां करना सरकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाता है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि हर वर्ष शिक्षकों को हटाकर नए लोगों की नियुक्ति करना न केवल शिक्षकों के शोषण का कारण बन रहा है, बल्कि इसकी संवैधानिक वैधता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कहा- संविधान की भावना के विपरीत याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वर्षा बिस्सा और अन्य ने दलील दी कि 11 जुलाई 2022 के सरकारी आदेश के माध्यम से गठित राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के जरिए नियमित कॉलेजों को सोसायटी के अधीन लाकर राजस्थान शिक्षा सेवा (कॉलेजिएट शाखा) नियम-1986 को अप्रभावी बना दिया गया है। उनका तर्क था कि यह कदम संविधान की भावना के विपरीत है। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद सरकार ने नई भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित कर दिए, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। खंडपीठ ने कहा कि जब तक मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक नई भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से प्रदेशभर में राजसेस और विद्या संबल योजना के तहत कार्यरत हजारों प्राध्यापकों को राहत मिली है।



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