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राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मिक जबलपुर में बोलीं:मल्लिकार्जुन खड़गे जिस पाले में खड़े वहां वैचारिकता शुद्ध नहीं,भाजपा में उनसे ज्यादा काम करने वाले दलित नेता




जबलपुर पहुंचीं राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मिक ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के मंच के शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि शुद्धिकरण खड़गे के मंच का नहीं, बल्कि उनकी वैचारिकता का होना चाहिए। सांसद ने कहा कि खड़गे बार-बार दलित नेता के साथ अपमान की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपने विचारों पर भी विचार करना चाहिए। बाल्मिक ने कहा, “मैं भी दलित हूं, लेकिन भाजपा और संगठन में मुझे कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। भाजपा समरसता में विश्वास करती है।” उन्होंने सवाल किया कि खड़गे अपनी वैचारिकता को कब शुद्ध करेंगे, यह पूरा देश जानना चाहता है। हल्द्वानी में खड़गे के कार्यक्रम के बाद हुआ था मंच का शुद्धिकरण दरअसल, हाल ही में उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यक्रम हुआ था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद हिंदू संगठन के कार्यकर्ता उस मंच पर पहुंचे, जहां खड़गे ने भाषण दिया था। कार्यकर्ताओं ने मंच का शुद्धिकरण किया। घटना के बाद कांग्रेस ने देशभर में प्रदर्शन कर इसे दलित नेता का अपमान बताया। कांग्रेस ने भाजपा और हिंदू संगठनों के इस कृत्य की आलोचना की थी। बोलीं- भाजपा में मुझसे ज्यादा काम करने वाले दलित नेता जबलपुर में दैनिक भास्कर से बातचीत में सुमित्रा बाल्मिक ने कहा कि भाजपा में उनसे ज्यादा काम करने वाले कई दलित नेता हैं और वे सनातनी विचारधारा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनका स्वयं का उदाहरण सामने है कि भाजपा और संगठन में उन्हें कभी भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि दलित समाज भी खड़गे से यह सवाल पूछना चाहता है कि वे अपनी वैचारिकता को कब शुद्ध करेंगे। सनातन के खिलाफ बोलने का लगाया आरोप सांसद ने कहा कि खड़गे जिस राजनीतिक विचारधारा के साथ खड़े होकर बयान देते हैं, उसमें सनातन के प्रति नकारात्मक सोच दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति लगातार सनातन के खिलाफ बोलता है और विवाद होने पर खुद को दलित बताता है, तो उसे पहले अपने विचारों पर विचार करना चाहिए। बाल्मिक ने कहा, आप जिस पाले में खड़े होकर बोलते हैं, वहां आपकी वैचारिकता शुद्ध नहीं है। आपकी सबसे बड़ी महानता यही होगी कि पहले आप अपने विचारों को शुद्ध करें। जहां आप खड़े हैं, वहां हमेशा सनातन के खिलाफ बोला जाता है और जब फंसते हैं तो कहते हैं कि मैं दलित हूं। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की सामाजिक पहचान का सम्मान होना चाहिए, लेकिन राजनीतिक और वैचारिक मतभेदों पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।



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