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रामानुजगंज में 5.50 करोड़ रुपए की भाला गिरवानी सिंचाई परियोजना पहली तेज बारिश में ही सवालों के घेरे में आ गई है। लगभग 4.88 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन कंक्रीट नहर कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। मरम्मत कार्य में वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा है, बल्कि कंक्रीट को डंडों से दबाकर काम किया जा रहा है। घाघा नदी से निकाली जा रही यह 5.5 किलोमीटर लंबी नहर भाला, विजयनगर सहित आसपास के गांवों की लगभग 200 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करने वाली है। निर्माण पूरा होने से पहले ही नहर के टूटने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। किसानों का आरोप- घटिया सामग्री से हुआ निर्माण स्थानीय किसानों सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे ने आरोप लगाया है कि उन्होंने निर्माण कार्य के दौरान ही गुणवत्ता संबंधी शिकायतें विभाग के अधिकारियों से की थीं। उनका कहना है कि निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया, कंक्रीट की उचित क्योरिंग नहीं हुई और विभागीय निगरानी भी कमजोर रही। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि मरम्मत के दौरान भी तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है। कंक्रीट कार्य में जहां वाइब्रेटर मशीन का उपयोग आवश्यक होता है, वहीं मजदूर डंडों से कंक्रीट को दबाकर काम कर रहे हैं। यह तरीका मरम्मत की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई इस संबंध में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के लिए एसडीओ को मौके पर भेजा जा रहा है और रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन्होंने परियोजना का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराने की भी मांग उठाई है। दैनिक भास्कर ने नहर के क्षतिग्रस्त होने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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रामानुजगंज सिंचाई नहर पहली बारिश में टूटी:किसानों का आरोप- घटिया सामग्री से हुआ निर्माण, विभाग ने भेजी जांच टीम, रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
