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रायसेन में 10 दिन से बारिश गायब:सूखने लगे धान के खेत, 50 गांवों में अधूरी रोपाई; ट्यूबवेल भी देने लगे जवाब




रायसेन में मानसून की बेरुखी ने जिले में धान की खेती पर संकट खड़ा कर दिया है। पिछले 10 दिनों से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण धान के खेत सूखने लगे हैं। भूजल स्तर गिरने से ट्यूबवेल भी जवाब देने लगे हैं, जिससे किसानों के सामने फसल बचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई किसानों का कहना है कि यदि अगले दो-तीन दिनों में तेज बारिश नहीं हुई तो दोबारा रोपाई करनी पड़ सकती है। 20-25 दिन देरी से शुरू हुई थी रोपाई बारिश की कमी के कारण इस बार धान की रोपाई सामान्य से 20 से 25 दिन देरी से शुरू हुई। किसानों ने शुरुआती दौर में ट्यूबवेल के सहारे रोपाई तो कर ली, लेकिन अब लगातार सिंचाई के कारण ट्यूबवेल का जलस्तर भी तेजी से घट रहा है। 50 गांवों में आधी रोपाई अब भी अधूरी सांची विकासखंड के दीवानगंज, सेमरा, अंबाड़ी, नरखेड़ा, जमुनिया समेत करीब 50 गांवों में आधी से अधिक धान की रोपाई अब भी अधूरी है। जिन खेतों में रोपाई हो चुकी है, वहां नमी खत्म होने लगी है और पौधे सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। सुबह तक फिर सूख जाते हैं खेत किसान दिनभर ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिलने के कारण सुबह तक खेत दोबारा सूख जाते हैं। भूजल का पुनर्भरण नहीं होने से कई इलाकों में ट्यूबवेल भी कम पानी देने लगे हैं। दोबारा रोपाई का खतरा, बढ़ेगी लागत किसानों का कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो दोबारा रोपाई करनी पड़ेगी। इससे बीज, मजदूरी, डीजल और बिजली पर अतिरिक्त खर्च आएगा, जिससे धान की खेती और महंगी हो जाएगी। किसानों ने जताई चिंता किसान जितेंद्र साहू ने बताया कि एक महीने पहले धान की पौध तैयार कर ली थी, लेकिन बारिश नहीं होने से रोपाई प्रभावित हुई। वहीं किसान रघुवीर सिंह मीणा का कहना है कि धान का रोप बड़ा हो चुका है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है और दोबारा रोपाई करनी पड़ेगी।



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