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छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरधारी नायक ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग के कामकाज और सामने आए प्रकरणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयोग के सामने ऐसे मामले भी आए हैं, जिन्हें सुनकर हैरानी होती है। शिकायतकर्ता ने शिकायत की थी कि रावण का पुतला जलाने को उसका मानवाधिकार हनन बताते हुए सवाल किया कि रावण का पुतला क्यों जलाया जाता है, जबकि दुर्योधन ने उससे भी बड़े पाप किए थे, तो उसका पुतला क्यों नहीं जलाया जाता? आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष ने बताया कि शिकायतकर्ता को समझाया गया कि रावण मानव नहीं था और यह मामला मानवाधिकार आयोग के दायरे में नहीं आता। उन्होंने कहा कि आयोग के सामने ऐसे कई फर्जी मामले आते हैं, जिनकी संख्या 3 से 4 हजार है। 74 हजार प्रकरण, करीब 900 अभी पेंडिंग गिरधारी नायक ने बताया कि साल 2000 से 2026 तक आयोग के सामने करीब 74 हजार प्रकरण आए हैं। इनमें से करीब 900 मामले अभी लंबित हैं। इनमें ज्यादातर पिछले एक-दो साल के प्रकरण हैं। इनके जल्द निराकरण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 40-45% मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े आयोग के अनुसार कुल प्रकरणों में करीब 40 से 45 प्रतिशत मामले सामाजिक बहिष्कार से जुड़े हैं। हालांकि इनमें से करीब 1 प्रतिशत मामलों में ही कार्रवाई की स्थिति बनती है। ऐसे मामलों में जरूरत के अनुसार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, समझाइश या अपराध दर्ज करने जैसी कार्रवाई की गई है। 2009 से पेंशन नहीं मिली, आयोग ने लिया मामला आयोग के सामने पेंशन नहीं मिलने के करीब 150 मामले पहुंचे। इनमें किसी को 3 साल, किसी को 5 साल तो किसी को 7 साल से पेंशन नहीं मिली थी। एक मामला ऐसा भी था, जिसमें संबंधित व्यक्ति को 2009 से पेंशन नहीं मिली थी। आयोग ने ऐसे मामलों को टेकअप किया। जिला विजिट के दौरान ट्रेजरी अधिकारियों से चर्चा कर पेंशन प्रकरणों के निराकरण का प्रयास किया गया। आयोग के मुताबिक करीब 120 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। पेंशन मिलने के बाद कई पेंशनधारियों ने आयोग को धन्यवाद पत्र भी भेजे। छात्रों की कॉशन मनी लेकर डेली वेज कर्मचारियों के वेतन तक आयोग के सामने कॉलेज छात्रों की कन्संट मनी नहीं मिलने के मामले भी आए। शिकायत मिलने के बाद संबंधित कॉलेज को नोटिस भेजा गया और कई मामलों का निराकरण हुआ। इसी तरह कई डेली वेज कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने की शिकायतें भी आयोग के सामने पहुंचीं। आयोग ने मामलों को टेकअप कर संबंधित अधिकारियों के सामने रखा, जिसके बाद वेतन से जुड़े कई प्रकरणों का निराकरण हुआ। अनाथ बच्चों को गलत रास्ते पर जाने से रोकने पर जोर आयोग ने जिला अधिकारियों को अनाथ बच्चों को लेकर भी जरूरी निर्देश दिए। अधिकारियों से कहा गया कि ऐसे बच्चों पर ध्यान दिया जाए, ताकि वे अपराध या किसी गलत रास्ते पर न जाएं। आयोग के अनुसार नक्सली संगठनों में भी अनाथ बच्चों को जोड़े जाने के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे बच्चों की सुरक्षा और सही दिशा में देखभाल जरूरी है। ट्रक ड्राइवरों और सफाई कर्मचारियों के अधिकार भी अहम मुद्दा आयोग ने ट्रक ड्राइवरों की समस्याओं को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है। खास तौर पर जिन ड्राइवरों को ग्रुप इंश्योरेंस का लाभ मिलना चाहिए, उन्हें यह सुविधा दिलाना जरूरी है। इसी तरह सफाई कर्मचारियों को भी उनके अधिकार और सुविधाएं मिलना जरूरी है। आयोग ने कहा कि समाज के लिए महत्वपूर्ण काम करने वाले सफाई कर्मचारियों को उनके अधिकारों और व्यवस्था के तहत मिलने वाली सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। खबर अपडेट हो रही है…..
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रावण का पुतला क्यों जलाते हैं, दुर्योधन का क्यों नहीं?:मानवाधिकार आयोग में शिकायत, 26 साल में 74 हजार प्रकरण इनमें सामाजिक बहिष्कार के 40-45% मामले
