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मालाणी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा की ओर से भव्य मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए निमंत्रण एवं जनसहयोग यात्रा शुरू की गई है। इस यात्रा के माध्यम से क्षेत्र के लोगों को महोत्सव से जोड़ने के साथ ही मंदिर निर्माण और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए सहयोग जुटाया जा रहा है। 13 अक्टूबर को यात्रा के असाड़ा पहुंचने पर क्षत्रिय समाज के सरदारों ने कुल 12,26,400 रुपये की सहयोग राशि देने की घोषणा की। शारदीय नवरात्र की बीज के अवसर पर यह यात्रा श्री रावल मल्लीनाथ जी की जन्मस्थली गोपड़ी से शुरू हुई। यात्रा में जसोल के महंत श्री गणेशपुरी जी महाराज और संस्थान की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल भी शामिल रहे। यात्रा का उद्देश्य प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए सर्व समाज को आमंत्रित करना और धार्मिक आयोजन को जनभागीदारी से सफल बनाना है। संस्थान के सचिव सुमेर सिंह वरिया ने बताया कि मालाजाल-तिलवाड़ा परिसर में श्री रावल मल्लीनाथ जी का भव्य मंदिर निर्माणाधीन है। इसके साथ ही चार अन्य मंदिरों का निर्माण भी कराया जा रहा है। इन सभी पांच मंदिरों का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 2 सितंबर 2027 को आयोजित होगा। क्षत्रिय समाज ने घोषित किया 12.26 लाख रुपये का सहयोग निमंत्रण एवं जनसहयोग यात्रा के असाड़ा पहुंचने पर समाज के लोगों ने मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के लिए आर्थिक सहयोग की घोषणा की। सहयोगकर्ताओं में सुरेंद्र सिंह, विक्रम सिंह, भूपत सिंह, रणवीर सिंह सहित कई समाजजन शामिल रहे। असाड़ा में कुल 12,26,400 रुपये के सहयोग की घोषणा की गई। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सर्व समाज से सहयोग की अपील की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सभी सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी और श्री राणी रूपादे जी मालाणी की धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता के प्रमुख आधार हैं। उन्होंने बताया कि मंदिरों का निर्माण क्षेत्र की गौरवशाली धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके माध्यम से श्री रावल मल्लीनाथ जी के शौर्य, पराक्रम, धर्मनिष्ठा और लोककल्याणकारी आदर्शों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने सर्व समाज के लोगों से 2 सितंबर 2027 को होने वाले प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने और तन, मन तथा धन से सहयोग करने का आह्वान किया। नवरात्र की बीज पर मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु शारदीय नवरात्र की बीज के अवसर पर श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया और श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल-तिलवाड़ा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इस दौरान संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल और प्रबंधन समिति अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने विशेष पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, क्षेत्र की उन्नति, राष्ट्र की समृद्धि और विश्वकल्याण की मंगलकामना की गई। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने शारदीय नवरात्र को शक्ति, साधना और आध्यात्मिक चेतना का पर्व बताया। उन्होंने माँ ब्रह्मचारिणी के तप, त्याग और संयम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि श्री रावल मल्लीनाथ जी की वीरता, शौर्य, धर्मनिष्ठा और लोककल्याण की भावना तथा श्री राणी रूपादे जी की भक्ति, सामाजिक समरसता, समानता और मानव सेवा की परंपरा समाज को प्रेरणा देती है। निर्माणाधीन मंदिरों का किया निरीक्षण नवरात्र के अवसर पर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल और प्रबंधन समिति अध्यक्ष कुँवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने मालाजाल-तिलवाड़ा परिसर में निर्माणाधीन मंदिरों और अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने, पारंपरिक स्थापत्य शैली का ध्यान रखने और निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। निमंत्रण एवं जनसहयोग यात्रा में उत्तम सिंह, जोग सिंह, रघुवीर सिंह, लाल सिंह सिसोदिया असाड़ा, दीप सिंह, लाख सिंह, भगवान सिंह, स्वरूप सिंह और मांगू सिंह जागसा सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे। यात्रा के माध्यम से संस्थान की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में लोगों से संपर्क कर उन्हें आगामी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया जा रहा है।
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रावल मल्लीनाथ जी मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की यात्रा शुरू:असाड़ा में 12.26 लाख रुपए का सहयोग मिला, 2027 में होगा महोत्सव
