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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मंडी में प्रदर्शनी:130 बुनकर शामिल, 15 स्टॉल लगाए गए; आज से 11 अगस्त तक खरीदारी का मौका




राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय शिमला की ओर से आज मंडी में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान सेरी मंच पर 7 से 11 अगस्त तक आयोजित होने वाली हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री का शुभारंभ मंडलायुक्त डॉ. राज कृष्ण परुथी ने किया। कार्यक्रम में उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन भी मौजूद रहे। प्रदर्शनी में कुल 15 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश के बुनकरों, स्वयं सहायता समूहों और उत्पादक संगठनों द्वारा तैयार किए गए हथकरघा वस्त्र, हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। खादी उत्पादों के लिए लगाए गए विशेष स्टॉल भी आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। लगभग 130 बुनकरों ने भाग लिया होटल राजमहल में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें मंडी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 130 बुनकरों ने भाग लिया। नाबार्ड हिमाचल प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने हथकरघा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने सरोआ हैंडलूम प्रोड्यूसर कंपनी के प्रयासों का भी उल्लेख किया। पारंपरिक हथकरघा उद्योग ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आजीविका का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। विजेताओं को भी सम्मानित किया गया 6 अगस्त को केंद्रीय विद्यालय मंडी में आयोजित निबंध एवं चित्रकला प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह के साथ क्रमशः ₹3000, ₹2000 और ₹1000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया कार्यक्रम के दौरान अनुभवी हथकरघा कारीगरों को भी सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध बुनकर एवं नारी सखी पुरस्कार से सम्मानित अंशुल मल्होत्रा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बुनकरों को नवाचार अपनाने और पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के लिए प्रेरित किया। बड़ी संख्या में बुनकरों ने भाग लिया कार्यक्रम में जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक नेहा चौहान, लीड बैंक मैनेजर, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के अधिकारी, एनएसआईसी, हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक, विभिन्न स्वयं सहायता समूहों, उत्पादक संगठनों तथा बड़ी संख्या में बुनकरों ने भाग लिया। वक्ताओं ने हथकरघा उत्पादों की ब्रांडिंग, डिजिटल मार्केटिंग और बाजार से बेहतर जुड़ाव पर विशेष बल दिया।



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