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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 27 साल पुराने सड़क हादसे के एक मामले में पीड़ित के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दुर्घटना में 100% दिव्यांग होकर पैराप्लेजिक (शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से निष्क्रिय) हुए जयपाल को बड़ी राहत देते हुए मुआवजे की राशि 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 13.85 लाख रुपये कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने बीमा कंपनी को 2002 से लेकर भुगतान की तारीख तक बढ़ी हुई राशि पर 7.5% वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया है। जस्टिस परमोध गोयल की पीठ ने मामले से जुड़ी सात अपीलों का एक साथ निपटारा करते हुए बीमा कंपनी की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें उसने चालक के लाइसेंस को आधार बनाकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की थी। क्या था पूरा मामला धारूहेड़ा से भिवानी मार्ग पर 16 दिसंबर 1999 को तीन पहिया वाहन (आटो/टैंपो) और एक डंपर के बीच भीषण टक्कर हुई। हादसे में राज गिरी यादव, नरेश कुमार, राम प्रताप और शिव नारायण की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि जयपाल (25) और आलोक गंभीर रूप से घायल हुए थे। रेवाड़ी स्थित मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने डंपर चालक जाकिर हुसैन की लापरवाही मानते हुए जयपाल को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने किन आधारों पर बढ़ाया मुआवजा… ड्राइवर का लाइसेंस वैध माना: बीमा कंपनी का दावा था कि चालक के पास वैध लाइसेंस नहीं था। लेकिन हाई कोर्ट ने पाया कि बीमा कंपनी का अपना सर्वेयर ही लाइसेंस को वैध बता चुका था, जिसे झुठलाने में कंपनी पूरी तरह विफल रही। 100% दिव्यांगता और जीवनभर सहायक की जरूरत: हादसे के वक्त 25 साल के रहे जयपाल की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट आई थी और उनका ऑपरेशन हुआ। मेडिकल बोर्ड ने उन्हें 100% पैराप्लेजिक प्रमाणित किया, जिससे वे अपने दैनिक कामों के लिए जीवन भर दूसरों पर निर्भर हो गए। कोर्ट ने केयरटेकर (सहायक) का खर्च 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 2.52 लाख रुपये किया। भविष्य की जरूरतें: कोर्ट ने इलाज के दौरान आय का नुकसान, मेडिकल बिल, विशेष आहार, ट्रांसपोर्ट, दर्द एवं पीड़ा, भविष्य की संभावनाएं और मेडिकल खर्चों का नए सिरे से पुनर्मूल्यांकन कर 8.85 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि मंजूर की।
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रेवाड़ी एक्सीडेंट केस में 27 साल बाद हाईकोर्ट का फैसला:दिव्यांग को मिलेगा 13.85 लाख का मुआवजा; बीमा कंपनी की अपील खारिज
