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रेवाड़ी के हंस नगर में महज 26 साल की उम्र में आकाश चौहान ने जिन हाथों से अपनी बहन की चिता को मुखाग्नि दी, उन्हीं हाथों से 26 घंटे बाद गांव के उसी श्मशानघाट में 11 जुलाई की देर शाम पिता की चिता को मुखाग्नि देनी पड़ी। 6 दिन में रेवाड़ी के हंस नगर निवासी मधु की हंसती- खेलती दुनिया लूट गई। हंस नगर से टांकड़ी गांव तक अपनों को खोने का दुख हर किसी के चेहरे पर देखा जा सकता था। बता दें कि, 5 जुलाई को रेवाड़ी के हंस नगर निवासी मधु ने अपने घर के सामने बैठे अपने पति और उनके दोस्त को शाम करीब 4 बजे खुशी से चाय पिलाई, फिर बर्तन उठाकर रसोई में साफ करने लगी। तब उसके मन में कई प्रकार के सवाल घूम रहे होंगे। 5 माह बाद, 25 नवंबर को होने वाली बेटी की शादी और परिवार की खुशियां। तभी उसे धमाके की आवाज सुनाई दी। रसोई से बाहर निकली तो दुनिया लूट चुकी थी। भाई की ड्रेस को प्रेस करने बैठी बेटी और बचाने के लिए आए पति व उनके दोस्त के साथ चारपाई पर सो रही 2 साल की भतीजी धमाके में बुरी तरह झुलस चुके थे। बचाने के प्रयास में पति ने खुद को भी झुलसा दिया। उसकी चिल्लाने की आवाज सुनकर पहुंचे आसपास के लोग उन्हें झुलसी हालत में उठाकर अस्पताल की तरफ दौड़े। बेटी रोहतक और बाकी सीधे दिल्ली के अस्पताल पहुंचे। जहां चार दिन मौत से लड़ते- लड़ते 9 जुलाई की शाम बेटी तन्नु जिंदगी की जंग हार गई। 10 जुलाई की शाम शव गांव टांकड़ी पहुंचा। पिता को अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझता छोड़ 26 वर्षीय आकाश ने बहन की चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। बहन की चिता की आग की अभी ठंडी भी नहीं हुई थी, कि शनिवार सुबह करीब 11 बजे पिता भी जिंदगी की जंग हार गए। ऐसे निकाली आक्रोश की भड़ास शनिवार सुबह करीब 11 बजे जैसे ही रिटायर नायब सूबेदार सतबीर चौहान की मौत की खबर गांव पहुंची तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मोहल्ले से गांव तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के प्रति गुस्सा देखने को मिला। हर किसी की जुबां पर यही सवाल थे, शहर में इतना बड़ा हादसा हो गया। हमने अपने दो लोगों को खो दिया। अधिकारी 5 मिनट ही सही, यहां आकर हमारी सुनते और अपनी बताते तो मन को शांति मिल जाती। चुनाव में वोट लेने के लिए हर रोज 2-3 चक्कर काटने वाले नेताओं ने भी दुख की इस घड़ी में हमारी सुध नहीं ली। हमें तो भेड़ बकरियों की तरह मरने के लिए छोड़ दिया। 25 साल पहले आए रेवाड़ी गांव टांकड़ी निवासी सतबीर चौहान सन 2010 में सेना से नायब सूबेदार के पद से रिटायर हुए थे। रिटायर होने से पहले 2000 में गांव से रेवाड़ी शिफ्ट हो गए थे। उनके बड़े भाई का परिवार भी रेवाड़ी के आदर्श नगर में रह रहा है। खुद अब तक कीपैड वाला फोन प्रयोग करते थे। दो बच्चों में बड़ा बेटा आकाश प्राइवेट कंपनी में काम करता है। छोटी बेटी तन्नु की पढ़ाई पूरी हो चुकी था। कैथल निवासी हरियाणा पुलिस के क्लर्क के साथ रिश्ता पक्का हो चुका था। 25 नवंबर को शादी होनी थी। अब सावरनी तक इंतजार रिटायर सूबेदार के भतीजे टोनी चौहान ने कहा हमारा तो पूरा परिवार तबाह हो गया। जिस बहन को 5 माह बाद टोली में बैठाना था, उसी की अर्थी उठानी पड़ी। अब अपने चाचा को भी हमने खो दिया। इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी किसी बड़े अधिकारी और नेता ने परिवार से मिलकर उसकी पीड़ा सुनने की जरूरत नहीं समझी। चलो मान लें गांव शहर दूर है, हंस नगर तो सचिवालय से चंद कदम की दूरी पर है। 6 दिन बीतने के बाद भी विधायक और मंत्री तो छोड़ो, डीसी-एसपी ने जाना उचित नहीं समझा। सोमवार को सावरनी रस्म तक हम इंतजार करेंगे। यदि तब तक भी हमें न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया तो फिर हम चंडीगढ़ से दिल्ली तक भी लड़ाई लड़ेगें। जानिए क्या है पूरा मामला पूर्व सैनिक सतबीर चौहान का परिवार हंस नगर में रह रहा है। 5 जुलाई की शाम वह अपने दोस्त जयभगवान CRPF जवान के साथ घर के बाहर बैठे थे। बेटी तन्नु ने जैसे ही प्रेस करने के लिए स्विच ऑन किया तो जोरदार धमाका हुआ। जिससे तन्नु झुलस गई और घर के खिड़की दरवाजे टूट गए। तन्नु के पास ट्यूशन पढ़ने वाले 15 बच्चों के घर पहुंचने से कुछ समय पहले धमाका हुआ। धमाके की आवाज सुनकर बाहर से दोनों दोस्त बचाने के लिए अंदर गए तो वे भी चपेट में आ गए। रसोई से आई सतबीर चौहान की पत्नी मधु ने बचाव करने का प्रयास किया वह भी झुलस गई। चारपाई पर सो रही दो साल की बच्ची को भी धमाके ने अपनी चपेट में ले लिया। पड़ोसियों ने उन्हें अस्तपताल पहुंचाया। जहां से सभी को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। फोरेंसिक टीम और आईजीएल की टीमों ने मौके का निरीक्षण किया। धमाके बाद 3 दिन तक अलग-अलग टीमों ने जांच की। धमाके में झुलसने से पिता-पुत्री की मौत होने तक धमाके के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर गैस रिसाव को कारण बताने वाली पुलिस भी अभी स्प्ष्ट तौर पर कहने से बच रही है। इंद्रप्रस्थ गैस कंपनी के खिलाफ केस दर्ज रेवाड़ी से रोहतक पीजीआई रेफर हुई तन्नु की 9 जुलाई को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में मौत हो गर्ह। 10 जुलाई की शाम टांकड़ी गांव में शव का अंतिम संस्कार किया गया। मॉडल टाउन थाना पुलिस ने मां मधु की शिकायत पर इंद्रप्रस्थ गैस कंपनी (आईजीएल) कर्मियों के खिलाफ केस दर्ज किया। रेवाड़ी से दिल्ली रेफर हुए रिटायर नायब सूबेदार सतबीर चौहान का भी 11 जुलाई की सुबह उपचार के दौरान निधन हो गया। शव देर शाम करीब 7 बजे टांकड़ी गांव पहुंचा। जहां शव का अंतिम संस्कार किया गया।
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रेवाड़ी में 26 घंटे के भीतर उठी बेटी-पिता की अर्थी:धमाके में झुलसे पूर्व सैनिक ने तोड़ा दम, बेटे ने बहन- पिता की चिंता को दी मुखाग्नि
