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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच 4 जुलाई को करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। रूस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने यूक्रेन युद्ध समेत कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। मंत्रालय ने बातचीत को “व्यावसायिक और रचनात्मक” बताया। रूस के अनुसार, पुतिन ने ट्रम्प और अमेरिकी नागरिकों को अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ की शुभकामनाएं दीं। बातचीत के दौरान ट्रम्प ने यूक्रेन युद्ध को जल्द समाप्त कराने में सहयोग देने की अपनी इच्छा दोहराई। रूस ने कहा कि उसने एक बार फिर इस संघर्ष के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की वकालत की। वहीं मॉस्को का दावा है कि उसकी सेना युद्धक्षेत्र में बढ़त बनाए हुए है। दूसरी ओर रूस ने यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों पर संघर्ष को लंबा खींचने का आरोप लगाया। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रम्प से बातचीत की पुष्टि करते हुए इसे सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध समाप्त करने में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यह बातचीत नाटो के आगामी शिखर सम्मेलन से पहले हुई है, जहां यूक्रेन युद्ध प्रमुख मुद्दा रहने की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… लिथुआनिया में परमाणु हथियारों पर लगी संवैधानिक रोक हटाने की तैयारी, संसद में प्रस्ताव पेश रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच लिथुआनिया ने अपने संविधान से परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी रोक हटाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 141 सदस्यीय संसद (सीमास) के 51 सांसदों ने संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है। इस पहल को राष्ट्रपति गितानास नौसेदा का समर्थन प्राप्त है। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद-137 को हटाने की बात कही गई है। यह अनुच्छेद देश में सामूहिक विनाश के हथियारों और विदेशी सैन्य अड्डों की मौजूदगी पर रोक लगाता है। सरकार का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में यह प्रावधान अब अप्रासंगिक हो गया है। लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देश लंबे समय से रूस से संभावित खतरे का हवाला देते रहे हैं। हालांकि रूस इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि नाटो देशों पर हमला करने की उसकी कोई योजना नहीं है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देश रूस के खतरे का इस्तेमाल पूर्वी यूरोप में सैन्य विस्तार को उचित ठहराने के लिए कर रहे हैं। इस बीच, पूर्वी यूरोप में नाटो की सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं। कुछ रिपोर्टों में अमेरिका द्वारा पूर्वी यूरोप के अतिरिक्त नाटो देशों में परमाणु हथियार तैनात करने की संभावना जताई गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि नाटो का परमाणु ढांचा उसकी सीमाओं के और करीब लाया गया तो वह इसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरा मानते हुए जवाब देगा। पहले अमेरिकी पोप ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रवासियों के लिए करुणा और उदारता की अपील की अमेरिका के पहले पोप ने 4 जुलाई, अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इटली के लैम्पेडुसा द्वीप से प्रवासियों और शरणार्थियों के प्रति करुणा और उदारता दिखाने की अपील की। भूमध्यसागर में स्थित लैम्पेडुसा अफ्रीका से यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। यहां आयोजित कार्यक्रम के दौरान पोप ने कहा कि जरूरतमंद लोगों के साथ सहानुभूति, सम्मान और मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज और सरकारों से आग्रह किया कि प्रवासन के मुद्दे को केवल सुरक्षा या राजनीति के नजरिए से नहीं, बल्कि मानव गरिमा और करुणा के दृष्टिकोण से भी देखा जाए। अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर दिया गया यह संदेश ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और यूरोप में प्रवासन और शरणार्थी नीति को लेकर बहस तेज है। यूक्रेन को ‘गुप्त’ पैट्रियट मिसाइल भेजने के आरोप पर पोलैंड में सियासी बवाल
पोलैंड में यूक्रेन को कथित तौर पर गुप्त रूप से पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलें भेजे जाने के आरोपों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। सोशल मीडिया पर किए गए दावों में कहा गया कि पोलैंड ने मार्च में अमेरिका निर्मित PAC-3 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का एक बैच यूक्रेन को भेजा था। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संसद के उपाध्यक्ष और विपक्षी नेता क्रिज़्टोफ बोसाक ने कहा कि यदि यह दावा सही है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि पैट्रियट मिसाइलें पोलैंड की वायु सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं और भविष्य में किसी भी सैन्य हथियार या उपकरण को विदेश भेजने से पहले संसद की मंजूरी अनिवार्य की जानी चाहिए। पूर्व रक्षा मंत्री मारियुश ब्लाश्चाक ने भी सरकार से पूछा है कि क्या वास्तव में मिसाइलें यूक्रेन भेजी गईं और क्या इससे अमेरिका से मिलने वाली पोलैंड की अपनी पैट्रियट मिसाइलों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण पैट्रियट मिसाइलों की मांग तेजी से बढ़ी है। अमेरिका को भी अपने कुछ सहयोगी देशों को इनकी आपूर्ति में देरी करनी पड़ी है। हाल के दिनों में यूक्रेन और पोलैंड के संबंधों में भी कुछ मुद्दों पर तनाव बढ़ा है। पोलैंड पहले ही कह चुका है कि वह अपने शेष मिग-29 लड़ाकू विमान यूक्रेन को नहीं देगा।
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वर्ल्ड अपडेट्स:पुतिन-ट्रम्प में 90 मिनट तक बातचीत, यूक्रेन युद्ध खत्म कराने में मदद की पेशकश दोहराई
