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वाराणसी कोर्ट से 8 साल पहले गिरफ्तार पशु तस्कर दोषमुक्त:सिपाहियों पर वाहन चढ़ाने का आरोपी 2025 मरा, साक्ष्य-गवाह में फेल मिर्जामुराद पुलिस




वाराणसी एडीजे कोर्ट ने 8 साल पहले पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार पशु तस्करों को साक्ष्य और गवाहों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। हाईवे पर गिरफ्तारी के दौरान कई पन्नों की फर्द, वर्षों तक जेल में रहने वाली धाराएं और भारी भरकम चार्जशीट लगाने वाली मिर्जामुराद पुलिस कोर्ट में फेल हो गई। वारदात के 8 साल बाद आरोपियों के खिलाफ एक मजबूत साक्ष्य या रिपोर्ट पेश नहीं कर सकी। 8 साल पहले गिरफ्तारी दोनों आरोपियों में से एक आरोपी की दौरान विचारण 2025 में मौत हो गई, दूसरे को कोर्ट ने बरी कर दिया। आरोपी पर 50 रुपये का जुर्माना लगाकर पुलिस की कहानी को मनगढंत बताया। अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी (14वां वित्त आयोग) मनोज कुमार की अदालत ने पूरामुफ्ती, पुरानी बाजार, थाना पूरामुफ्ती, जनपद कौशाम्बी निवासी अभियुक्त मो. अफजल पुत्र को धारा 279 और 307 के आरोपों से संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत दोषसिद्ध करते हुए 50 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार यादव व अशफाक अहमद ने पक्ष रखा। अर्थदंड अदा नहीं करने की स्थिति में दोषसिद्ध को एक दिन के साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। 29 पशुओं को कंटेनर में ठूंसकर भरने और पुलिस टीम को कुचलने का आरोप मिर्जामुराद थाना क्षेत्र में वर्ष 2018 में कंटेनर ट्रक में भैंस और भैंसों को कथित रूप से क्रूरतापूर्वक ठूंस-ठूंसकर ले जाने तथा पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाकर जान से मारने के प्रयास के मामले में दर्ज केस में सुनवाई हुई। अभियोजन ने बताया कि 15 अक्टूबर 2018 को उपनिरीक्षक शम्स जावेद खान को एक कंटेनर में बड़ी संख्या में भैंस और भैंसों को ठूंस-ठूंसकर लादकर वाराणसी की ओर से कानपुर ले जाने की सूचना मिली जिसके बाद पुलिस टीम ने रखौना बरमबाबा तिराहे के पास वाहन चेकिंग शुरू की। कुछ देर बाद वाराणसी की ओर से एक कंटेनर आता दिखाई दिया। मुखबिर ने उसे वही वाहन बताया, जिसमें पशुओं को क्रूरतापूर्वक भरा गया था। पुलिसकर्मियों ने टॉर्च की रोशनी से वाहन को रोकने का प्रयास किया। कंटेनर के केबिन में बैठे व्यक्ति ने चालक से पुलिसकर्मियों पर गाड़ी चढ़ाने और उन्हें जान से मारने के लिए कहा। इसके बाद चालक ने पुलिसकर्मियों को निशाना बनाकर वाहन तेज गति और लापरवाही से चलाया। पुलिसकर्मियों ने किसी तरह अपना बचाव करते हुए कंटेनर को रोक लिया। कंटेनर रुकने के बाद उसमें सवार दो लोगों ने दोनों तरफ से कूदकर भागने का प्रयास किया, जिन्हें पुलिस ने कुछ दूरी तक पीछा कर पकड़ लिया। पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान चालक हशीब अहमद और खलासी मो. अफजल के रूप में हुई थी। कंटेनर से 29 पशु बरामद होने का दावा पुलिस ने चार्जशीट में बताया कि कंटेनर का दरवाजा खुलवाकर जांच की गई तो उसमें कुल 29 पशु मिले। इनमें 24 काली भैंस, तीन भूरी भैंस और दो काले भैंसे बताए गए। वाहन का पंजीकरण नंबर HR55M2788 बताया गया। बरामद पशुओं को वाहन से उतारकर उनकी देखभाल, चारा-पानी और सुरक्षा के लिए ग्राम खजुरी निवासी भइया लाल को सुपुर्द किया गया था। मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया और बाद में उनके खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। विचारण के दौरान एक आरोपी की मौत केस की सुनवाई के दौरान अभियुक्त हशीब अहमद की मृत्यु हो गई। इसके बाद अदालत ने 28 जनवरी 2025 को उसके विरुद्ध चल रही कार्यवाही उपशमित कर दी। इसके बाद मामले में शेष अभियुक्त मो. अफजल के विरुद्ध सुनवाई जारी रही। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से उपनिरीक्षक शम्स जावेद खान, कांस्टेबल बहादुर यादव, हेड कांस्टेबल धर्मेंद्र यादव और विवेचक उपनिरीक्षक बृजेश सिंह को गवाह के रूप में पेश किया गया। बचाव पक्ष ने पुलिस की कहानी पर उठाए सवाल अभियुक्त की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि घटना के समय वाहन चालक हशीब अहमद था और मो. अफजल केवल खलासी के रूप में वाहन में मौजूद था। इसलिए धारा 279 के तहत वाहन को लापरवाही से चलाने का आरोप उसके विरुद्ध साबित नहीं होता। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कथित तौर पर पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाने के प्रयास में किसी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई। किसी पुलिसकर्मी का मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया। इसके अलावा घटनास्थल पर किसी स्वतंत्र सार्वजनिक व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया। धारा 307 में भी अभियोजन पर्याप्त साक्ष्य नहीं दे सका अदालत ने अपने फैसले में पाया कि कथित घटना में पुलिस बल को कोई चोट नहीं आई थी। गवाहों की जिरह में भी यह तथ्य सामने आया कि घटना में किसी सार्वजनिक व्यक्ति, सरकारी संपत्ति अथवा निजी संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ। अदालत ने घटनास्थल के नक्शे और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करते हुए यह भी माना कि कंटेनर की वास्तविक गति को लेकर पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। नक्शानजरी में पुलिसकर्मियों को वाहन रोकने के संकेत दिए जाने वाले स्थान और वाहन रुकने वाले स्थान के बीच दूरी का स्पष्ट उल्लेख भी नहीं था। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने अभियोजन को मो. अफजल के खिलाफ धारा 279 और 307 IPC के आरोप संदेह से परे साबित करने में असफल माना और दोनों आरोपों में उसे दोषमुक्त कर दिया। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के आरोप पर अदालत ने अभियोजन के साक्ष्यों को पर्याप्त माना। ट्रक के अंदर 27 भैंस और दो भैंसा रखे गए थे और उन्हें चलने-फिरने अथवा हिलने-डुलने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं था।



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