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संभल में चारागाह की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाई गई मजार को सोमवार दोपहर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई तहसीलदार न्यायालय के बेदखली आदेश के अनुपालन में की गई। प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती की थी। मामला संभल तहसील के थाना रायसत्ती क्षेत्र के नीमखेड़ा बझेड़ा गांव का है। यहां गाटा संख्या 118 की कुल 1.493 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में चारागाह के रूप में दर्ज है। प्रशासन के अनुसार, इसी भूमि के करीब 50 वर्गमीटर हिस्से पर कब्जा कर मजार का निर्माण किया गया था। 20 साल पुराना बताया गया कब्जा नायब तहसीलदार शुभम प्रताप सिंह ने बताया कि उक्त कब्जा करीब 20 साल पुराना बताया गया है। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 67 के तहत वाद चला। न्यायालय ने 9 जून 2026 को संबंधित भूमि से मजार हटाने का आदेश जारी किया था। इसी आदेश के अनुपालन में सोमवार को प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची। ध्वस्तीकरण के लिए दो बुलडोजर मंगाए गए थे, लेकिन एक बुलडोजर से ही मजार को ध्वस्त कर दिया गया। दो घंटे पहले पहुंचा पुलिस बल कार्रवाई से करीब दो घंटे पहले ही पुलिस बल मौके पर पहुंच गया था। दोपहर 2:30 बजे ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। कार्रवाई के दौरान तीन थानों की पुलिस के साथ पीएसी की एक प्लाटून कंपनी तैनात रही। असमोली सीओ अमन सिंह के मुताबिक, रायसत्ती थाना प्रभारी सौरभ त्यागी, नखासा थाना प्रभारी संजय शर्मा और असमोली के क्राइम इंस्पेक्टर संजीव गिरी समेत 50 से अधिक पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे। ग्रामीणों के कब्जे की भी होगी पैमाइश नायब तहसीलदार ने बताया कि चारागाह की इसी भूमि पर कुछ ग्रामीणों के भी कब्जे की बात सामने आई है। सोमवार सुबह हुई बारिश के कारण मौके पर पानी भर गया था, जिसके चलते अन्य कब्जों की पैमाइश नहीं हो सकी। पानी कम होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण ने पुलिस चौकी और गौशाला बनाने की मांग उठाई गांव मबई ठकुरान निवासी राजपाल सिंह ने प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि वह करीब तीन साल से इस मामले की शिकायत कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकार में उनकी शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई। राजपाल सिंह ने प्रशासन से संबंधित भूमि पर पुलिस चौकी और गौशाला बनाए जाने की मांग की। उन्होंने क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों से जुड़े पुराने स्थल को लेकर भी अपनी बातें रखीं और कहा कि वहां पहले रामायण का आयोजन होता था। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की ओर से फिलहाल कार्रवाई को राजस्व न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बताया गया है।
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संभल में सरकारी जमीन पर बनी मजार ध्वस्त:तहसीलदार के बेदखली आदेश के बाद चला बुलडोजर, 50 वर्गमीटर भूमि पर था अवैध कब्जा
