सड़क निर्माण पर FCC मेंबर ने उठाए सवाल:बोले-सिर्फ 2 जगह पर खराब, फिर भी ढाई किलोमीटर कर दी कारपेटिंग; मेयर-कमिश्नर को शिकायत




लुधियाना शहर में नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों और सड़कों पर कारपेटिंग के काम को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में चल रहे सड़क निर्माण की गुणवत्ता और एस्टीमेट प्रक्रिया पर फाइनांस एंड कांट्रेक्ट कमेटी (FCC) के सदस्य और वार्ड नंबर 26 से पार्षद गौरव भट्टी ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्षद जब शेरपुर आरती स्टील से जमालपुर चौक तक बनने वाली करीब 2.5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य का जायजा लेने पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए। पूरी सड़क सही सलामत थी, लेकिन इसके बावजूद उस पर नई कारपेटिंग बिछाई जा रही थी। पार्षद भट्टी ने मौके पर ही काम को तुरंत रुकवाने का प्रयास किया, लेकिन ठेकेदार के वर्कर्स काम जारी रखते हुए सड़क बनाते रहे। गौरव भट्टी का आरोप है कि पूरी 2.5 किलोमीटर की सड़क में सिर्फ दो जगह पर ही गड्ढे थे, जिन्हें साधारण पैच वर्क के जरिए आसानी से ठीक किया जा सकता था। इसके बावजूद नगर निगम के अफसरों ने कथित मिलीभगत के तहत पूरी सड़क का टेंडर निकाल दिया और वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए।यह पूरा मामला सरकारी खजाने और जनता के टैक्स के पैसों की सरेआम बर्बादी की ओर इशारा करता है। शहर में कई ऐसे इलाके हैं जहां सड़कें पूरी तरह टूट चुकी हैं और लोग लंबे समय से नई सड़क बनने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन वहां ध्यान देने के बजाय ठीक-ठाक सड़कों पर कारपेटिंग में बजट खपाया जा रहा है। पार्षद भट्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए मेयर और कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपने का ऐलान किया है। पार्षद गौरव भट्टी ने सड़क निर्माण पर कही ये अहम बातें… पाइपलाइन के लिए खोदी गई थी सड़क: गौरव भट्टी ने बताया कि शेरपुर आरती स्टील से जमालपुर चौक तक की रोड केवल दो स्थानों पर वाटर सप्लाई की पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई थी। जरूरत सिर्फ उन दो गड्ढों को रिपेयर करने की थी, लेकिन अफसरों ने वहां मामूली पैच वर्क कराने के बजाए ढाई किलोमीटर लंबी पूरी सड़क पर ही कारपेटिंग शुरू करवा दी। दफ्तरों में बैठकर बन रहे फर्जी एस्टीमेट: पार्षद ने निगम अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि अफसर जमीनी हकीकत जाने बिना दफ्तरों में बैठकर ही एस्टीमेट तैयार कर रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि धरातल पर कौन सी सड़क बनने योग्य है और कौन सी नहीं। इससे पहले भी FCC की बैठकों में ऐसे कई फर्जी एस्टीमेट पकड़े जा चुके हैं, जिन्हें BR (बिल्डिंग एंड रोड) ब्रांच के अफसर ड्राफ्ट्समैन की गलती बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। लेकिन इस मामले में वर्क ऑर्डर तक जारी हो चुके हैं, जिसकी मंजूरी बड़े अफसरों ने ही दी है। सीएम फंड का दिया जा रहा हवाला: जब पार्षद ने इस अनावश्क काम को लेकर संबंधित सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (SE) से बात की, तो अधिकारी ने सफाई दी कि यह सड़क ‘मुख्यमंत्री फंड’ से बनाई जा रही है। इस पर भट्टी ने ऐतराज जताते हुए कहा कि फंड चाहे किसी भी कोटे का हो, पैसा जनता का ही है। अफसर केवल अपने निजी मुनाफे और कमीशन के चक्कर में बिना जरूरत वाली जगहों पर काम करवा रहे हैं। 6 करोड़ के बजट की जांच की मांग: अफसरों से मिली जानकारी के अनुसार लुधियाना में कुछ चुनिंदा सड़कों के निर्माण के लिए सीएम फंड से नगर निगम को 6 करोड़ रुपये का बजट मिला है। भट्टी ने मांग की है कि इस 6 करोड़ रुपये के बजट का इस्तेमाल उन खस्ताहाल सड़कों के लिए होना चाहिए जहां लोग सालों से परेशान हैं। वे इस फर्जीवाड़े की पूरी रिपोर्ट तैयार कर मेयर और नगर निगम कमिश्नर को सौंपेंगे ताकि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।



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