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नगरपरिषद चुनाव के परिणामों के बाद सभापति पद को लेकर राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। नगरपरिषद में एसटी ओपन सीट होने से भाजपा के वार्ड 4 विजेता दिनेश राणा और वार्ड 9 विजेता मुकेश रावत का नाम सबसे आगे चल रहा है। वहीं भाजपा के प्रबल दावेदार माने जा रहे छोटी सरवन के पूर्व प्रधान राजेश कटारा वार्ड 17 से चुनाव हार गए। कांग्रेस के गौतम मईड़ा ने उन्हें हराया।
पहली बार नगर निकाय चुनाव लड़ रही बीएपी 19 उम्मीदवार उतारने के बावजूद एक भी वार्ड नहीं जीत सकी। दिनेश राणा और मुकेश रावत सभापति की रेस में नगरपरिषद चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में कई बड़े उलटफेर सामने ला दिए हैं। नगरपरिषद में एसटी ओपन की सीट होने के कारण सभापति पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा से वार्ड 4 के विजेता दिनेश राणा और वार्ड 9 से जीत दर्ज करने वाले मुकेश रावत अब सभापति की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। राजेश कटारा को कांग्रेस के गौतम मईड़ा ने हराया इस चुनाव में कई बड़े दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा है। भाजपा के सभापति पद के सबसे प्रबल दावेदारों में शुमार छोटी सरवन के पूर्व प्रधान राजेश कटारा वार्ड 17 से चुनाव हार गए। उनके सामने कांग्रेस के गौतम मईड़ा ने चुनाव जीता है। बीएपी का नगरपरिषद में नहीं खुला खाता विधानसभा चुनावों के समीकरणों से चर्चा में आई भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के लिए बांसवाड़ा नगरपरिषद का यह चुनाव निराशाजनक रहा। बांसवाड़ा विधानसभा से पार्टी के विधायक प्रत्याशी रहे और निर्दलीय चुनाव लड़कर पार्षद बने हेमंत राणा इस बार वार्ड 1 से बीएपी के टिकट पर मैदान में उतरे थे। उन्हें भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। वार्ड 1 से निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 20 वार्डों में उतारे थे उम्मीदवार पहली बार नगर निकाय चुनाव में किस्मत आजमा रही बीएपी ने नगरपरिषद के कुल 20 वार्डों में अपने उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से एक उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद 19 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इसके बावजूद पार्टी का एक भी उम्मीदवार जीत हासिल नहीं कर सका। चुनाव परिणाम के बाद नगरपरिषद में बीएपी का खाता तक नहीं खुल पाया।
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सभापति रेस में भाजपा के दो दावेदार आगे:एसटी ओपन सीट पर दिनेश राणा और मुकेश रावत आगे, बीएपी के राजेश कटारा चुनाव हारे
