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बेतिया जिले के बाबू टोला चौक के चमरटोली गांव स्थित सरकारी स्कूल में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठ गए हैं। स्कूल में बच्चों के लिए बनाई गई लौकी-दाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में लौकी-दाल बहुत पतली और पानी जैसी दिख रही है। वीडियो सामने आने के बाद स्कूल में बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और उसकी निगरानी व्यवस्था पर चर्चा होने लगी है। वायरल वीडियो में दिख रही भोजन की स्थिति को लेकर स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता तय मानकों के हिसाब से होनी चाहिए। नियमित जांच और निगरानी पर सवाल ऐसे में भोजन बनाने से लेकर बच्चों को परोसने तक की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है। इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए तैयार होने वाले मिड-डे मील की नियमित जांच और निगरानी किस स्तर पर होती है। भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और पौष्टिकता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी कितनी नियमितता से निरीक्षण करते हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए। बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना उद्देश्य अगर वायरल वीडियो में दिख रही स्थिति सही है और बच्चों को ऐसा ही भोजन परोसा गया है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह भी साफ किया जाना जरूरी है। साथ ही, भोजन बनाने वाली व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका और स्कूल स्तर पर की जाने वाली निगरानी की भी जांच की जरूरत है। मध्यान भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसकी जांच आवश्यक है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
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सरकारी स्कूल में मिड-डे मील की क्वालिटी पर सवाल:बेतिया में लौकी और दाल का वीडियो वायरल
