![]()
भारतीय जनता पार्टी (BJP) हरियाणा के संगठन में अंदरूनी कलह सोमवार को उजागर हो गया। जिला अध्यक्ष की कार्यशैली से नाराज चल रहे जिले के 13 मंडलों में 11 मंडल अध्यक्षों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रदेश अध्यक्ष को भेजी गई संयुक्त त्यागपत्र चिट्ठी में मंडल अध्यक्षों ने जिला नेतृत्व पर तानाशाही रवैये, एकतरफा फैसलों और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। मंडल अध्यक्षों के इस्तीफ की गूंज प्रदेश हाईकमान और सरकार तक पहुंच गई है। इन मंडल अध्यक्षों से आज संगठन व सरकार के नुमाइंदें बातचीत कर सकते हैं। इन मंडल अध्यक्षों ने जिलाध्यक्ष को हटाने और पूर्व में हटाए गए तीन मंडल अध्यक्ष, उकलाना मंडल से विनोद कुमार, अग्रोहा मंडल से मोहन लाल और स्याहड़ा मंडल से बजलीत फोगाट को वापस संगठन में लेने की मांग की है। इनको कार्यकाल पूरा होने से पहले ही भाजपा जिलाध्यक्ष ने बाहर का रास्ता दिखा था। जानिए मंडल अध्यक्षों ने इस्तीफे में क्या कहा… तानाशाही कार्यप्रणाली और संवाद की कमी: जिले में लंबे समय से संगठनात्मक संवाद खत्म हो चुका है। उसकी जगह एकतरफा निर्णय, तानाशाहीपूर्ण कार्यप्रणाली और समर्पित कार्यकर्ताओं की निरंतर उपेक्षा की जा रही है। विभिन्न चुनावों के दौरान जिला अध्यक्ष द्वारा लिए गए निर्णयों और व्यवहार का असर पार्टी पर पड़ा। इससे कार्यकर्ताओं में भ्रम, असंतोष और निराशा का माहौल उत्पन्न हुआ, जिसका असर चुनाव तैयारियों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ा। शिकायत पर समाधान के बजाए गाज :मंडल अध्यक्षों ने बताया कि उन्होंने प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पूनियां, संगठन मंत्री फणींद्रनाथ शर्मा और मंत्री कृष्ण बेदी से मुलाकात कर मामले की पूरी जानकारी दी थी। लेकिन शिकायतों पर निष्पक्ष विचार करने के स्थान पर बिना किसी कारण और बिना नोटिस के 3 मंडल अध्यक्षों को पदमुक्त कर दिया गया। आत्मसम्मान को गहरी चोट: इस अचानक कार्रवाई से समर्पित कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंची है। संगठन में संदेश गया कि पार्टी हित में बात रखना और आवाज उठाना सजा का कारण बन सकता है। मंडल अध्यक्षों ने स्पष्ट किया कि यह सामूहिक इस्तीफा किसी पद या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से प्रेरित नहीं है। उनका भाजपा की विचारधारा और संगठन के प्रति समर्पण पहले की तरह अटूट रहेगा। शिकायत करने पर मंडल अध्यक्षों को हटाया था मंडल अध्यक्षों के पत्र से साफ है कि जिला अध्यक्ष की कार्यशैली व चुनावी निर्णयों से कार्यकर्ताओं में भारी असंतोष है। 11 मंडल अध्यक्षों ने शीर्ष संगठन मंत्रियों व महामंत्रियों से मिलकर शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के समाधान के बजाय तीन मंडल अध्यक्षों पर जिलाध्यक्ष ने कार्रवाई कर दी और बिना नोटिस 3 मंडल अध्यक्षों को पद से हटा दिया गया। इससे आहत होकर सभी 11 मंडल अध्यक्षों ने एकजुट होकर प्रदेशाध्यक्ष को सामूहिक त्यागपत्र भेज दिया। प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता के नाम लिखे इस्तीफे की कॉपी.. पहले भी रणजीत चौटाला से विवाद के बाद गई थी कुर्सी 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान जिलाध्यक्ष रहीं आशा खेदड़ का रणजीत चौटाला के साथ विवाद हो चुका है। इस विवाद के चलते कार्यकाल पूरा करने से 8 महीने पहले ही उनको हटा दिया गया था। रणजीत चौटाला हिसार से BJP के प्रत्याशी थे। रणजीत चौटाला हिसार से लोकसभा चुनाव हार गए थे। इसकी इंटरनल रिपोर्ट BJP हाईकमान को सौंपी थी। इसके बाद आशा खेदड़ को इस्तीफा देना पड़ा था मगर उनको बाद में फिर से जिलाध्यक्ष बना दिया गया।
Source link
सामूहिक इस्तीफ के बाद डैमेज कंट्रोल में BJP:हिसार के सभी 11 मंडल अध्यक्षों से बातचीत करेगी पार्टी: जिलाध्यक्ष पर गिर सकती है गाज
